राज्यपाल के समझाने पर भी नहीं माना आदिवासी शिष्टमंडल, अपने जिलों में अपने कानून की जिद

राज्यपाल के समझाने पर भी नहीं माना आदिवासी शिष्टमंडल, अपने जिलों में अपने कानून की जिद

पत्थलगड़ी पर राज्यपाल ने समझाया और संविधान का अध्ययन करने के बाद परामर्श की बात कही. मगर शिष्टमंडल अपनी जिद पर अड़ा रहा. आदिवासी स्वशासन के पक्ष में नारेबाजी की गई. उन्होंने अपने प्रभाव वाले करीब 12 जिलों में सरकारी के साथ अदालती आदेश नहीं मानने साथ अपने कानून लागू होने की बात कही है.

  • Share this:
रांची. पत्थलगड़ी के मुद्दे पर राज्यपाल की समझाइश के बाद भी आदिवासी शिष्टमंडल अपनी जिद छोडऩे को तैयार नहीं है. शिष्टमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की मगर वह असंतुष्ट रहे. इनकी जिद है कि हर सूरत में हाई कोर्ट और विधानसभा में पत्थलगड़ी करेंगे. अल्बर्ट एक्का चौक और फिरायालाल चौक पर भी पत्थलगड़ी की जाएगी. राज्यपाल ने उन्हें समझाया और संविधान का अध्ययन करने के बाद परामर्श की बात कही. मगर शिष्टमंडल अपनी जिद पर अड़ा रहा. आदिवासी स्वशासन के पक्ष में नारेबाजी की गई. उन्होंने अपने प्रभाव वाले करीब 12 जिलों में सरकारी के साथ अदालती आदेश नहीं मानने साथ अपने कानून लागू होने की बात कही है.

गौरतलब है कि सोमवार को ये लोग पत्थलगड़ी करने हाई कोर्ट और अलबर्ट एक्का चौक पहुंचे थे. अंग्रेजी में लिखा विशाल शिलालेख और बैनर, पोस्टर के साथ विरोध प्रदर्शन किया गया. घंटों पत्थलगड़ी और स्थानीय आदिवासी स्वशासन के पक्ष में नारेबाजी करते रहे. चार थानों की पुलिस और एसपी-डीएसपी ने किसी तरह समझाकर उन्हें वापस किया था. पहड़ा व्यवस्था कुर्गनेशन काउंसिल के संयोजक धनेश्वर टोप्पो ने कहा कि 26 जनवरी 1950 को ही पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र का दर्जा दिया गया है. इनमें झारखण्ड के 12 जिले पूर्ण रूप से और तीन आंशिक रूप से शामिल हैं. रांची, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, लातेहार, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला खरसावां, दुमका, साहिबगंज, पाकुड़ व जामताड़ा संपूर्ण जिला और  पलामू, गढ़वा और गोड्डा आंशिक रूप से अनुसूचित जिले हैं.

अनुसूचित क्षेत्रों में सरकारी आदेश नहीं मानने पर अड़े समर्थक

पत्थलगड़ी समर्थकों की दलील है कि अनुसूचित क्षेत्रों में न किसी अदालत का फैसला चलेगा न राज्य सरकार का कार्यकारी आदेश. यहां सामान्य लोगों के लिए भी कोई अधिकार नहीं है. यानी उन इलाकों में सामान्य आदमी को भ्रमण के लिए भी अनुमति लेनी होगी. पत्थलगड़ी समर्थक जो शिलालेख लेकर घूम रहे हैं उसमें भारत सरकार के 2007 के गजट और संविधान की पांचवीं, छठी अनुसूची का हवाला है. आंदोलनकारी मानते हैं कि इन जिलों में हमारा कानून चलेगा. पहड़ा, मानकी परगनैत और ग्राम सभा जैसे आदिवासी स्वशासन व्यवस्था से वह खुद को अलग मान रहे हैं.

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.