रिम्स में 39 वर्षों से हो रही रेडियोलॉजी की पढ़ाई, छात्रों ने की मान्यता दिलाने की मांग

साल दर साल 1979 से रेडियोलॉजी पीजी कोर्स बिना मान्यता के चलता रहा और पहले आरएमसीएच और फिर रिम्स का प्रबंधन गहरी नींद में क्यों सोया रहा.

Upendra Kumar | News18 Jharkhand
Updated: September 16, 2018, 1:39 PM IST
रिम्स में 39 वर्षों से हो रही रेडियोलॉजी की पढ़ाई, छात्रों ने की मान्यता दिलाने की मांग
निधि खरे ,प्रधान सचिव ,स्वास्थ्य विभाग
Upendra Kumar
Upendra Kumar | News18 Jharkhand
Updated: September 16, 2018, 1:39 PM IST
सूबे के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में अति महत्वपूर्ण रेडियोलॉजी की पीजी , डिग्री और डिप्लोमा कोर्स 39 वर्षों से बिना एमसीआई की मान्यता के चल रहा है. भविष्य बर्बाद होने के भय के बीच पीजी के छात्र-छात्राओं ने शीघ्र ही एमसीआई से कोर्स को मान्यता दिलाने की मांग सरकार से की है. पीजी के छात्रों को इसलिए अपने भविष्य की चिंता सता रही है क्योंकि राज्य के बाहर न इस डिग्री के आधार पर उन्हें नौकरी मिलेगी और न ही वे किसी संस्थान में एडवांस कोर्स कर सकते हैं. सवाल यह है कि साल दर साल 1979 से रेडियोलॉजी पीजी कोर्स बिना मान्यता के चलता रहा और पहले आरएमसीएच और फिर रिम्स का प्रबंधन गहरी नींद में क्यों सोया रहा.

साल दर साल सूबे के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में छात्र-छात्राएं 'मास्टर डिग्री इन रेडियोलॉजी' और 'पीजी डिप्लोमा' कोर्स करते रहे. बिना मान्यता के चल रहे कोर्स को पूरा करने के बाद कुछ की नौकरी झारखंड में ही लग गई तो कुछ छात्रों ने पास आउट होने के बाद दूसरे विषयों में पढ़ाई कर ली. अब जब पिछले अप्रैल महीने में रेडियोलॉजी के छात्र-छात्राओं ने पेन डाउन स्ट्राइक कर दिया तब जाकर रिम्स प्रबंधन जागा और रेडियोलॉजी विभाग की कमियों को एमसीआई के मानक के अनुसार पूरा करने की कोशिश की गई. पर पांच महीने में भी अभी तक इंस्पेक्शन नहीं हो सका है और छात्र-छात्राओं को फिर से अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है.

परेशान छात्र-छात्राओं ने स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे से मुलाकात भी की है. स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि मंशा यह है कि एमसीआई के निरीक्षण से पहले सरकार हर उस मानक को पूरा करना चाहती है ताकि एमसीआई रेडिलॉजी पीजी कोर्स को मान्यता दे ही दे.

एक्सरे ,एमआरआई, अल्ट्रासोनोग्राफी जैसे मेडिकल क्षेत्र के महत्वपूर्ण जांच की पढ़ाई जिस रेडियोलॉजी विभाग के तहत होती है उस कोर्स की लगभग 39 साल से बिन मान्यता के रिम्स में पढ़ाया जाना यह साबित करता है कि हम अपने प्रतिभाओं के भविष्य को लेकर कितने संवेदनहीन हैं. अब उम्मीद की जानी चाहिए कि स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे के आश्वासन के बाद शीघ्र एमसीआई की टीम विभाग में उपलब्ध संसाधनों ,फैकल्टी की जांच कर पीजी कोर्स को मान्यता दे देगा.
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