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नक्सली समस्या के सामाधान के लिए रघुवर सरकार की पहल

नक्सली समस्या के सामाधान के लिए रघुवर सरकार की पहल

नक्सल समस्या विकास के मार्ग मे सबसे बड़ी बाधा है. इस समस्या के समाधान के बिना विकसित झारखंड की कल्पना नहीं की जा सकती. प्रदेश की रघुवर दास सरकार इस तथ्य को बखूबी समझती है. शायद यही वजह है कि सरकार ने इस तरफ ठोस कदम उठाने शुरू किए हैं.

नक्सल समस्या विकास के मार्ग मे सबसे बड़ी बाधा है. इस समस्या के समाधान के बिना विकसित झारखंड की कल्पना नहीं की जा सकती. प्रदेश की रघुवर दास सरकार इस तथ्य को बखूबी समझती है. शायद यही वजह है कि सरकार ने इस तरफ ठोस कदम उठाने शुरू किए हैं.

नक्सल समस्या विकास के मार्ग मे सबसे बड़ी बाधा है. इस समस्या के समाधान के बिना विकसित झारखंड की कल्पना नहीं की जा सकती. प्रदेश की रघुवर दास सरकार इस तथ्य को बखूबी समझती है. शायद यही वजह है कि सरकार ने इस तरफ ठोस कदम उठाने शुरू किए हैं.

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नक्सल समस्या विकास के मार्ग मे सबसे बड़ी बाधा है. इस समस्या के समाधान के बिना विकसित झारखंड की कल्पना नहीं की जा सकती. प्रदेश की रघुवर दास सरकार इस तथ्य को बखूबी समझती है. शायद यही वजह है कि सरकार ने इस तरफ ठोस कदम उठाने शुरू किए हैं.

एक सकारात्‍मक सोच के साथ सरकार नक्सलवाद को खत्म करने की जो पहल शुरू की है, वह अब जमीन पर दिखने लगी है. सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए समग्र कार्ययोजना पर काम शुरू किया है. इस कड़ी में एक ओर भटके हुए युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना, जो नक्सली सूबे के विकास योजनाओं को रोकने का प्रयास करते है, उनके खिलाफ कठोर पुलिसिया कार्रवाई और सुदूरवर्ती क्षेत्रों मे रहने वाले ग्रामीणों के बीच एक विश्‍वास और भयमुक्त वातावरण का निर्माण शामिल है.

सरकार ने इस प्रयास मे एक ओर जहां भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आत्मसमर्पण एंव पुनर्वास नीति मे बड़ा बदलाव करते हुए उसे काफी आकर्षक बनाया है. वहीं दूसरी ओर नक्सलियों से सख्ती से निपटने को लेकर भी कवायद तेज कर दी है. इन सबके बीच ग्रामीणों मे पुलिस की छवि बदले इसका भी खासा ख्याल रखा जा रहा है. इसकी झलक बीते एक सप्‍ताह में नक्सल समस्या को लेकर सरकार और राज्य पुलिस के स्तर पर किए गए कामों में देखने को मिली.

लातेहार मे नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ मे भी पुलिस का एक नया चेहरा देखने को मिला. पुलिस ने बड़े नक्सली नेता की अगुवाई वाले मारक दस्ते के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए दो सदस्यों को मार गिराया. वहीं इस मुठभेड़ में गंभीर रुप से घायल महिला नक्सली से मिलने डीजीपी खुद घटना स्थल पहुंचे और उस महिला नक्सली के बेहतर इलाज को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिया.

उसके बाद महिला नक्सली को ना सिर्फ रिम्स मे भर्ती कराया गया, बल्कि एडीजी मुख्यालय और आईजी मुख्यालय खुद उस महिला नक्सली का हाल जानने रिम्स पहुंचें.दोनो अधिकारियों ने महिला नक्सली को हर संभव मदद देने का आश्‍वासन दिया. निश्चित तौर पर पुलिस की इस तरह की पहल से पुलिस का एक नया चेहरा सामने आया है, जिसमें नक्सल समस्या के खत्म करने का जज्बा दिख रहा है.

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