अनुपयोगी जमीन को लेकर क्या है रघुवर सरकार की मंशा

सरकार की जमीन पर काफी अतक्रिमण भी है. सरकार ने इसके लिए लैंड बैंक बनाया है. पहले योजना थी कि जरूरतमंद औद्योगिक घरानों को जमीन दी जाए ताकि यहां कल कारखाने लग सकें. लेकिन अब तो सरकार अनुपयोगी भूमि बता कर किसी भी जमीन की नीलामी करने की सोच रही है. भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद रवींद्र राय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है.

Rajesh Kumar
Updated: June 15, 2018, 12:14 AM IST
अनुपयोगी जमीन को लेकर क्या है रघुवर सरकार की मंशा
राज्य में अनुपयोगी जमीन को लेकर क्या सोच रही रघुवर सरकार
Rajesh Kumar
Rajesh Kumar
Updated: June 15, 2018, 12:14 AM IST
झारखंड में एक गंभीर विषय सरकार की सोच के ईर्द-गिर्द घूम रहा है. सरकार को लगता है कि उसके पास काफी मात्रा में अनुपयोगी जमीन है. सरकार को ऐसा लगता है कि इसे बेच दिया जाना चाहिए. आखिर
सरकार के समक्ष ऐसी सोच कैसे सामने आई. क्या सरकार का खजाना खाली हो गया है. इसलिए वह ऐसा काम करने की सोच रही है. कुछ दिनों पूर्व यह संकेत रघुवर सरकार की ओर से आए हैं. राजस्व विभाग के
अधिकारी इस पर अपना पक्ष भी रखने लगे हैं.

बता दें कि झारखंड में जमीन कई तरह के हैं. गैर मजरुआ, खाता 383 की जमीन, जंगल झाड़ जमीन वगैरह. सरकार ने लगभग दो साल पहले सर्वे कराया था. इसके तहत सवा छह लाख हेक्टेयर भूमि सरकार की है. इसके अधीन कई प्रकार के जमीन हैं. सरकार की जमीन शहर से लेकर गांव तक व जंगल झाड़ तक में है.

सरकार की जमीन पर काफी अतक्रिमण भी है. सरकार ने इसके लिए लैंड बैंक बनाया है. पहले योजना थी कि जरूरतमंद औद्योगिक घरानों को जमीन दी जाए ताकि यहां कल कारखाने लग सकें. लेकिन अब तो
सरकार अनुपयोगी भूमि बता कर किसी भी जमीन की नीलामी करने की सोच रही है. भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद रवींद्र राय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है.

सवाल उठने लगा है कि क्या झारखंड सरकार के दिन इतने खराब आ गए हैं कि वह अब अपनी जमीन नीलाम करेगी. क्या उसे खजाना भरने की चिंता है या फिर विकास की कोई नई कहानी गढ़ने की कोशिश हो रही है. ऐसे संवेदनशील विषय पर सरकार के अपने ही भड़के हुए हैं.
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