स्कूलों के विलय मामले में अपनों से भी घिरती जा रही रघुवर सरकार

मंत्री सरयू राय ने भी सांसदों की मांग को जायज ठहराया है और इसे एक अलोकप्रिय निर्णय बताया है. प्रमुख विपक्षी दल जेएमएम ने सांसदों और मंत्रियों के इस आपत्ति को मुद्दा बना कर सरकार पर हमला बोला है.

Manoj Kumar | News18 Jharkhand
Updated: August 11, 2018, 12:45 PM IST
स्कूलों के विलय मामले में अपनों से भी घिरती जा रही रघुवर सरकार
झारखंड - स्कूलों के विलय के निर्णय पर सरकार गैरों के साथ-साथ अपनों से भी घिरती नजर आ रही है.
Manoj Kumar | News18 Jharkhand
Updated: August 11, 2018, 12:45 PM IST
स्कूलों के विलय का निर्णय राज्य सरकार के लिए गले का फांस बनता जा रहा है. पहले से विपक्ष के विरोध को झेल रहे सरकार को अपनी ही पार्टी के 11 सांसदों के आपत्ति और पुनर्विचार के आग्रह के बाद मंत्री सरयू राय ने भी सवाल उठा कर जहां सरकार को परेशानी में ला दिया है वहीं अब विपक्ष इसे मु्द्दा बना कर सरकार को घेरने की तैयारी में है. प्रमुख विपक्षी दल जेएमएम और कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला बोला है.

स्कूलों के विलय के निर्णय पर सरकार गैरों के साथ-साथ अपनों से भी घिरती नजर आ रही है. विधानसभा सत्र में विपक्ष के हमलों को झेल कर किसी तरह निकल सरकार एक बार फिर इस मुद्दे पर अकेली खड़ी नजर आ रही है. पार्टी के 11 सांसदों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर इस निर्णय पर आपत्ति जताते हुए पुनर्विचार का आग्रह किया है.

वहीं मंत्री सरयू राय ने भी सांसदों की मांग को जायज ठहराया है और इसे एक अलोकप्रिय निर्णय बताया है. प्रमुख विपक्षी दल जेएमएम ने सांसदों और मंत्रियों के इस आपत्ति को मुद्दा बना कर सरकार पर हमला बोला है. जेएमएम महासचिव सुप्रीयो भट्टाचार्या ने कहा कि सरकार एक ओर शराब की दुकान खोल रही है और दूसरी ओर स्कूलों को बंद कर उन्हें अशिक्षित बनाने की योजना पर काम कर रही है. जेएमएम इस मु्द्दे को लेकर लगातार सरकार का विरोध करती रही है और अब सरकार के मंत्री और सांसदों ने भी विरोध जताना शुरू कर दिया है.

बैठे बिठाये मुद्दा हाथ लगने पर कांग्रेस भी पीछे नहीं है. कांग्रेस ने भी सरकार के इस निर्णय और सांसदों - मंत्री सरयू राय के विरोध को मुद्दा बनाते हुए सरकार पर तंज कसा है. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत ने कहा कि सरकार एक ओर स्कूल खोलने के नाम पर जमीन अधिग्रहण करने की बात कह कर सीएनटी - एसपीटी एक्ट में बदलाव कर रही है वहीं दूसरी ओर स्कूलों को बंद कर रही है. ये पता ही नहीं चल रहा है कि सरकार किस सोंच से क्या निर्णय ले रही है.

मालूम हो कि सरकार ने वैसे स्कूलों के विलय करने का निर्णय लिया है जहां बच्चे कम हैं या फिर शिक्षकों की कमी है. सरकार के इस निर्णय से सूबे के एक हजार से अधिक स्कूलों का विलय हो जाएगा. ऐसे में विपक्ष के साथ-साथ अपनों के विरोध पर सरकार क्या निर्णय लेती है, स्कूलों के विलय का निर्णय वापस लेती है या फिर उसे लागू करती है ये देखना दिलचस्प होगा.
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