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झारखंड: राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को मौका JMM के लिए जरूरी भी मजबूरी भी!

झारखंड में सत्तापक्ष के अंदर उम्मीदवारी के सवाल पर घमासान मचा हुआ है. पहली वरीयता के उम्मीदवार को लेकर कांग्रेस ने दावा ठोक दिया है. (फाइल फोटो)

झारखंड में सत्तापक्ष के अंदर उम्मीदवारी के सवाल पर घमासान मचा हुआ है. पहली वरीयता के उम्मीदवार को लेकर कांग्रेस ने दावा ठोक दिया है. (फाइल फोटो)

Jharkhand Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव को लेकर कोई भी फैसला जेएमएम के लिये इतना आसान नहीं है. यही वजह है कि जेएमएम ने 28 मई को विधायक दल की बैठक आहूत की है. जमीन लीज से लेकर ED और शेल कंपनी के मामले में राजनीतिक रूप से घिरी जेएमएम फिलहाल गठबंधन के अंदर कोई किचकिच नहीं चाहेगी. ऐसे में ठंडे दिमाग के साथ अगले दो दिनों में जेएमएम किसी निष्कर्ष तक पहुंच सकती है.

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रांची. झारखंड में राज्यसभा की दो सीट पर होने वाले चुनाव में सत्ताधारी दल के अंदर एकजुटता की अग्निपरीक्षा होने जा रही है. महागठबंधन के अंदर से कांग्रेस की उम्मीदवारी के दावे ने जेएमएम की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पहले से सरकार पर भ्रष्टाचार के लग रहे आरोप के बीच राज्यसभा चुनाव में सहयोगी दल को रूठने से रोकने की कोशिश होगी. हालांकि पिछली बार भले ही जेएमएम अध्यक्ष शिबू सोरेन राज्यसभा की सीट जीतने में कामयाब हुए हों, पर उस चुनाव में कांग्रेस का उम्मीदवार भी मैदान में था.

झारखंड में राज्यसभा चुनाव का दंगल अब तक सज नहीं पाया है. कारण सत्ता पक्ष या विपक्ष की तरफ से उम्मीदवार का चयन नहीं हो पाना है. बीजेपी की तरफ से तो उम्मीदवारी को लेकर NDA के अंदर कोई अगर या मगर नहीं है, पर महागठबंधन के अंदर उम्मीदवारी के सवाल पर घमासान जरूर मचा है. पहली वरीयता के उम्मीदवारी को लेकर कांग्रेस ने दावा ठोक दिया है.

प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने पिछले राज्यसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए इस बार मौका कांग्रेस को मिलने की बात कही है. कांग्रेस का ये भी कहना है कि पिछली बार मुख्यमंत्री की सहमति से ही कांग्रेस का उम्मीदवार मैदान में उतारा गया था. जेएमएम को बड़े भाई का फर्ज निभाते हुए बड़ा दिल दिखाना होगा.

राज्यसभा चुनाव को लेकर कोई भी फैसला जेएमएम के लिये इतना आसान नहीं है. यही वजह है कि जेएमएम ने 28 मई को विधायक दल की बैठक आहूत की है. जमीन लीज से लेकर ED और शेल कंपनी के मामले में राजनीतिक रूप से घिरी जेएमएम फिलहाल गठबंधन के अंदर कोई किचकिच नहीं चाहेगी. ऐसे में ठंडे दिमाग के साथ अगले दो दिनों में जेएमएम किसी निष्कर्ष तक पहुंच सकती है.

यहां इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि बगैर जेएमएम के सहयोग के कांग्रेस का उम्मीदवार जीत नहीं सकता है, जबकि जेएमएम की जीत के लिये कांग्रेस का समर्थन जरूरी नहीं. जेएमएम के प्रवक्ता मनोज पांडेय की माने तो गठबंधन दल की मांग पर जरूर  विचार किया जाएगा. पार्टी अध्यक्ष शिबू सोरेन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विधायकों के साथ बैठक के बाद अंतिम निर्णय पर पहुंचेंगे.

राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार पर अंतिम फैसला दिल्ली में बैठक के बाद ही संभव है. कांग्रेस ने जेएमएम के सामने पासा जरूर फेंका है, पर पासा फेंक कर तमाशा देखने की रणनीति कितनी सफल हो पाती है ये तो जेएमएम का अगला रुख ही तय करेगा.

Tags: CM Hemant Soren, Jharkhand Congress, JMM, Rajya Sabha Elections

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