झारखंड में संगठन की मजबूती से तय होगा कुर्सी का खेल, CM हेमंत पर सबको साधने की चुनौती 

झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार को बने डेढ़ साल बीत चुके हैं. लेकिन अभी तक 20 सूत्री से लेकर बोर्ड-निगम का बंटवारा नहीं हो सका है (फाइल फोटो)

Jharkhand News: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष अपने सहयोगी दलों को खुश रखने की चुनौती होगी. 20 सूत्री की बात हो या निगरानी समिति की, बोर्ड-निगम की बात व आयोग बंटवारे पर सत्ताधरी दलों के कार्यकर्ताओं से लेकर बड़े नेताओं और विधायकों की नजरें इस पर टिकी हैं

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रांची. झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार के पहले इम्तिहान की घड़ी सामने आ गयी है. यह इम्तिहान सत्ताधरी दलों के बीच बेहतर तालमेल की हकीकत को बयां करेगा. बीस सूत्री से लेकर निगरानी समिति व बोर्ड निगम से लेकर आयोग की कुर्सी को लेकर राजनीति तेज हो गई है. जिला और प्रखंड स्तर पर संगठन की मजबूती और कमजोरी के आधार पर कुर्सी का खेल शुरू होने जा रहा है.

सरकार गठन के बाद पहली बार हेमंत सोरेन सरकार (Hemant Soren Government) का इम्तिहान होने जा रहा है. इस इम्तिहान में हेमंत सोरेन (Hemant Soren) के समक्ष (सामने) अपने सहयोगी दलों को खुश रखने की चुनौती होगी. 20 सूत्री की बात हो या निगरानी समिति की, बोर्ड-निगम की बात व आयोग बंटवारे पर सत्ताधरी दलों के कार्यकर्ताओं से लेकर बड़े नेताओं और विधायकों की नजरें इस पर टिकी हैं. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने सरकार का सहयोगी दल होने के नाते अपना दावा पेश कर दिया है. दावा विधानसभा में मिली सीट और उसके प्रदर्शन के साथ-साथ जनाधार वाले क्षेत्र को लेकर है. आरजेडी के प्रदेश प्रवक्ता मनोज कुमार के अनुसार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस पर निर्णय लेना है. एक सहयोगी दल के नाते पार्टी ने अपनी बात और सरकार से उम्मीद को उनके समक्ष रखने का काम किया है.

कुर्सी बंटवारे को लेकर सबसे ज्यादा कांग्रेस में हंगामा जारी है. हंगामा भी ऐसा वैसा नहीं, रांची से लेकर दिल्ली दरबार तक का. कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता-विधायक नाराजगी के बहाने लगातार संगठन और सरकार पर दबाव बनाने में जुटे हैं. झारखंड कांग्रेस प्रभारी आर.पी.एन सिंह भी इस मुद्दे पर गंभीर दिख रहे हैं. कांग्रेस का मानना है कि कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान मिलना जरूरी है और इसके लिये फॉर्मूला तय कर लिया गया है. कांग्रेस ने इसके लिये पहले चार और अब उसमें दो सदस्यों का इजाफा करते हुए छह सदस्यों की कमिटी को जिम्मेदारी दी है. कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर के अनुसार पहले 20 सूत्री और निगरानी समिति का गठन होगा और उसके बाद बोर्ड-निगमों की बारी है.

जो सहयोगी दल जितना मजबूत है उसे उसी हिस्से में कुर्सी मिलेगी

कुर्सी बंटवारे का फॉर्मूला जिला से लेकर प्रखंड स्तर पर राजनीतिक दलों की मजबूती और कमजोरी पर टिका है. विधानसभा में विधायकों की मौजूदा संख्या और विधानसभा चुनाव में उसके प्रदर्शन को कुर्सी बंटवारे का आधार बनाने की तैयारी है. मतलब जो जितना मजबूत है उसे उसी हिस्से में कुर्सी मिलेगी. झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य कहते हैं कि इस बंटवारे में सबकी हिस्सेदारी होगी. सभी सहयोगी दलों के मान-सम्मान का ख्याल रखा जाएगा. बहुत जल्द इसकी घोषणा कर दी जाएगी.

झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार को बने डेढ़ साल बीत चुके हैं. अब तक कोरोना संक्रमण की वजह से 20 सूत्री से लेकर बोर्ड-निगम का बंटवारा नहीं हो सका है, पर अब सहयोगी दलों के अंदर से ही सरकार पर दबाव बढ़ने लगा है. अब देखना होगा कि कुर्सी के इस खेल में कौन पास होता है और कौन फेल.

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