कोरोना की वजह से आदिवासी समाज इस बार सोशल डिस्टेंसिंग से मना रहा करमा पर्व
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कोरोना की वजह से आदिवासी समाज इस बार सोशल डिस्टेंसिंग से मना रहा करमा पर्व
झारखंड में आदिवासी समाज के लोग पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ करमा का पर्व मनाते हैं (pic credit: instagram/ranchiblog)

कोरोना महामारी (Corona Virus) को देखते हुए इस बार लोगों को भीड़-भाड़ में पूजा नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं. इस वजह से इस बार करमा पर्व (Karma Festival) का स्वरूप मस्ती और आनंद के बजाय आस्था पर टिका होगा

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  • Last Updated: August 29, 2020, 4:53 PM IST
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रांची. झारखंड (Jharkhand) में आदिवासी समाज आज यानी शनिवार को करमा पर्व (Karma Festival) मना रहा है. लेकिन इस बार कोरोना वायरस (Corona Virus) की वजह से लोगों को भीड़-भाड़ और समूह में पूजा नहीं करने की सलाह दी गई है. ऐसे में राजधानी रांची (Ranchi) के सभी अखड़ों में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ करमा पर्व मनाया जा रहा है. दरअसल आदिवासी समाज अपने सभी त्योहारों में प्रकृति की पूजा करता है. करमा पर्व के दौरान करमा के पेड़ की पूजा की जाती है और करम देव से राज्य के खेत-खलिहान में खुशहाली और अच्छी फसल की प्रार्थना की जाती है. इसके अलावा महिलाएं उपवास रखकर अपने भाइयों के अच्छे स्वास्थ्य और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करती हैं.

इन तमाम विधि-विधानों के बीच करमा पेड़ का बड़ा महत्व है. ढोल-नगाड़े और मांदर की थाप के बीच करमा पेड़ से डाली काटकर लाई जाती है और उसकी पूजा बनाए गए अखड़ा में लगाकर पारंपरिक तरीके से की जाती है. दिन भर अखड़े को सजाने की तैयारी चलती है और रात में आदिवासी लोग करम देव की कहानियां सुनते हैं. फिर समूह बनाकर महिलाएं और पुरुष नृत्य करते हैं. साथ ही सामूहिक भोज का भी आयोजन करते हैं. हालांकि इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से रांची के सभी अखड़ों में सामाजिक दूरी बनाकर करमा मनाया जा रहा है. लोगों को भीड़-भाड़ में पूजा नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं. इस वजह से इस बार करमा पर्व का स्वरूप मस्ती और आनंद के बजाय आस्था पर टिका होगा.

आदिवासी समाज करमा के पेड़ की पूजा-अर्चना कर सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मांगता है




रांची केंद्रीय सरना समिति के मुख्य पहन जगलाल बताते हैं कि आदिवासी समाज में करमा पेड़ का महत्व और उसको लेकर बहुत आस्था है. दरअसल करमा पेड़ के जड़ों की गहराई काफी होती है और इसे सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसलिए करमा पर्व के दौरान करमा पेड़ कर्म देव का प्रतीक माना जाता है. जिससे आदिवासी समाज कर्म करने की सीख लेते हैं और प्रकृति के करीब रहने की शिक्षा ग्रहण करते हैं.
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