बदहाली के शिकार बिरसा मुंडा के वंशज! सब्जी बेचने को मजबूर पड़पोती ने CM को लिखा पत्र

बिरसा मुंडा की पड़पोती जिस कॉलेज में पढ़ती है उसी के सामने वाली सड़क पर वो अन्य महिलाओं के साथ सब्जी बेचती है

बिरसा मुंडा की पड़पोती जिस कॉलेज में पढ़ती है उसी के सामने वाली सड़क पर वो अन्य महिलाओं के साथ सब्जी बेचती है

खूंटी बाजारटांड़ के पास सब्जी बेच रही महिलाओं और युवतियों में वीर बिरसा मुंडा (Birsa Munda) की पड़पोती जौनी कुमारी मुंडा भी शामिल है. वो यहां कच्चे कटहल का कोवा बेचने को मजबूर है. सड़क के उस पार ही उसका कॉलेज है, जहां से वो ग्रैजुएशन की पढ़ाई कर रही है

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रांची. वीर बिरसा मुंडा की 121वीं पुण्यतिथि पर पूरा झारखंड और आदिवासी समाज उन्हें याद कर रहा है. इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी. मुख्यमंत्री के कार्यालय (CMO) ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी जिसमें कहा गया कि धरती आबा ने समाज में बीमारियों को लेकर फैले अंधविश्वास को मिटाने का काम किया था. आज उनसे प्रेरणा लेकर हमें कोरोना को दूर भगाना है.

सीएम हेमंत ने पुण्यतिथि पर बिरसा मुंडा (Birsa Munda) को याद कर रस्म अदायगी भले पूरी कर दी हो. मगर आदिवासियों में भगवान का दर्जा हासिल करने वाले बिरसा मुंडा के परिजनों का हाल जानकर आप हैरान रह जाएंगे. बिरसा मुंडा की पड़पोती जहां स्कॉलरशिप के लिए जद्दोजहद कर रही है. वहीं, उनका पड़पोता 12 साल से प्रमोशन के इंतजार में है.

बिरसा मुंडा की पड़पोती की मुख्यमंत्री के नाम खुला ख़त

बिरसा मुंडी की पड़पोती जौनी कुमारी मुंडा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम से पत्र लिखकर अपनी पीड़ा बयां की है. पत्र में उन्होंने लिखा, 'आदरणीय मुख्यमंत्री जी, मैं जौनी कुमारी मुंडा, भगवान बिरसा मुंडा की वंशज. मैं अभी बिरसा कॉलेज खूंटी में बीए पार्ट-3 की छात्रा हूं. जब शिक्षक बिरसा मुंडा के आंदोलन के बारे में पढ़ाते हैं, तो गर्व होता है. लेकिन, मैं किसी को नहीं बताती कि मैं उनकी पड़पोती हूं. क्योंकि लोग हमारी स्थिति देखकर निराश हो जाएंगे. सुनती हूं कि आदिवासी छात्राओं को पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति का लाभ मिलता है. मैंने कई बार आवेदन दिए, लेकिन कभी नहीं मिली. मेरे पिता सुखराम मुंडा 82 वर्ष की उम्र में भी खेतों में मेहनत करते हैं. उन्हें 1,000 रुपए वृद्धावस्था पेंशन मिलती है, उसी से मेरी पढ़ाई का खर्च चलता है.  भगवान बिरसा ‘अबुआ दिशुम अबुआ राज’ की बात करते थे. आज झारखंड में अबुआ राज है, लेकिन हमारी स्थिति थोड़ी भी नहीं सुधरी. मैं सरकार से कुछ नहीं मांगती. अलग से कुछ नहीं चाहिए, लेकिन जो नियम जनजातियों के लिए बने हैं, जो योजनाएं गरीबों के लिए हैं, उनका लाभ तो मिले. मैं अपने लिए, अपने बाबा, अपनी मां के लिए सम्मान चाहती हूं. बस इतना ही.'

आदिवासियों के 'भगवान' कहे जाने वाले बिरसा मुंडा की 121वीं पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि दी

सड़क किनारे सब्जी बेचने को मजबूर बिरसा मुंडा की पड़पोती 

खूंटी बाजारटांड़ के पास सब्जी बेच रही महिलाओं और युवतियों में जौनी कुमारी मुंडा भी शामिल है. वो यहां कच्चे कटहल का कोवा बेचने को मजबूर है. सड़क के उस पार उसका कॉलेज है, जहां से वो ग्रैजुएशन की पढ़ाई कर रही है.



जौनी का कहना है कि वो उच्च शिक्षा हासिल कर गांव और अन्य बच्चों को शिक्षित करना चाहती है. पार्ट-3 की पिछली परीक्षा सेमेस्टर-3 में उसने 73.2 प्रतिशत नंबर लाए थे. कॉलेज में तीन बार छात्रवृत्ति के लिए आवेदन भरे, लेकिन उसे अभी तक स्कॉलरशिप नहीं मिली.

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