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रांची के ब्लड बैंकों में खून की कमी, कोरोना काल में लोग नहीं कर रहे रक्तदान!


रिम्स के ब्लड बैंक की ऐसी स्थिति इसलिए बनीं क्योंकि कोरोना के बढते संक्रमण से लोग रक्तदान नहीं कर रहे.

रिम्स के ब्लड बैंक की ऐसी स्थिति इसलिए बनीं क्योंकि कोरोना के बढते संक्रमण से लोग रक्तदान नहीं कर रहे.

Ranchi News: झारखंड में कोरोना का संकट है तो दूसरी ओर रक्तदान नहीं होने के चलते ब्लड बैंक खाली होते जा रहे हैं. रिम्स के जुनियर डॉक्टरों के प्रयास से एक दो दिन के लिए खून की व्यवस्था तो हो गई है लेकिन अगर डॉनर नहीं आते तो आने वाले दिनों में यह एक बड़ा संकट आने वाला है.

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रांची. कोरोना का संक्रमण बढ़ते ही राजधानी रांची के ब्लड बैंकों में खून की बहुत ज्यादा कमी हो गई है. रिम्स में तो महज एक दिन का खून बचा है तो सदर अस्पताल में भी सिर्फ तीन दिनों के लिए ही खून बचा है. रिम्स के ब्लड बैंक में तो खून की कमी के चलते जहां थैलसेमिक बच्चों को खून मिलने में परेशानी हो
रही है. अन्य मरीजों के परिजनों को बिना डोनर के ब्लड नहीं मिल रहा. राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के ब्लड बैंक में हाथ में डॉक्टर का पर्चा और गोदी में नन्ही बेटी को लिए बैठी पतरातू की चांदनी के दिलों की धड़कन तेज हैं. वार्ड में भर्ती उसके थैलसेमिक बेटे को रक्त की जरूरत है पर वह नहीं मिल रहा. चांदनी News18 से कहती है कि कल उसे ब्लड मिला था पर आज अभी तक वह इंतजार ही कर रही है. चांदनी अकेली नहीं है जिसे अपने बीमार मरीज के लिए ब्लड की जरूरत है. बोकारो से अपनी बीमार भाभी को रिम्स में भर्ती कराने के बाद जब प्रयाग ब्लड बैंक में आए तो उनसे कहा गया कि सेम ग्रुप का ब्लड मिलने पर ही ब्लड मिल सकेगा. अब प्रयाग की समस्या है कि वह रांची में किसी को नहीं जानता और उसका ब्लड ग्रुप उसके बीमार भाभी के ब्लड ग्रुप से अलग है.

संकटमोचक बनकर आगे आये रिम्स के जूनियर डॉक्टर रिम्स के ब्लड बैंक की ऐसी स्थिति इसलिए बनीं क्योंकि कोरोना के बढते संक्रमण से लोग रक्तदान नहीं कर रहे. रिम्स में हर दिन 100 यूनिट के करीब रक्त की जरूरत होती है लेकिन स्टॉक में सिर्फ 90 यूनिट है. निगेटिव ग्रुप का रक्त समाप्त हो चुका है. सदर अस्पताल के ब्लड बैंक की भी स्थिति ऐसी ही है. ऐसे में रिम्स के जुनियर डॉक्टर एसोसियशन ने ब्लड डोनेशन कैंप लगाकर 100 यूनिट ब्लड एकत्रित करने का लक्ष्य रखा है और न सिर्फ खुद रक्तदान कर रहे हैं बल्कि लोगों से भी रक्तदान के लिए आगे आने की अपील कर रहे हैं. जेडीए रिम्स के डॉ अनितेश गुप्ता ने बताया कि जब रिम्स का ब्लड बैंक खाली होने के कगार पर पहुंच गया तो और कोई रास्ता नहीं बचा था. ऐसे में अर्जेंट कॉल पर रक्तदान शिविर लगाकर लक्षय से ज्यादा 118 यूनिट ब्लड एकत्रित किया गया ताकि मरीजों की जान बचाई जा सके.

रिम्स के 118 जूनियर डॉक्टरों ने आज रक्तदान कर मानवता की सेवा की. इन्ही 118 में से एक डॉ साईंमा ने आम लोगों से भी रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की और कहा कि रक्तदान यह सोचकर करें कि कोरोना महामारी में इसकी ज्यादा से ज्यादा जरूरत पड़ सकती है.
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