रांची सिविल कोर्ट ने तब्लीगी जमात से जुड़े 17 विदेशी नागरिकों को किया बरी, अब लौट सकते हैं वतन, जानें क्या है पूरा मामला?

तब्लीगी जमात से जुड़े 17 विदेशियों को रांची के हिंदपीढ़ी इलाके से 30 मार्च को गिरफ्तार किया गया था. (फाइल फोटो)
तब्लीगी जमात से जुड़े 17 विदेशियों को रांची के हिंदपीढ़ी इलाके से 30 मार्च को गिरफ्तार किया गया था. (फाइल फोटो)

रांची सिविल कोर्ट (Ranchi Court) ने एक केस के सिलसिले में तब्लीगी जमात (Tabligi Jamaat) से जुड़े 17 विदेशी नागरिकों (Foreign nationals) को बरी कर दिया है. इन पर कोरोना फैलाने का आरोप था. अब कोर्ट के इस फैसले से इनकी वतन वापसी का रास्ता साफ हो गया है.

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रांची. रांची सिविल कोर्ट (Ranchi Court) ने तब्लीगी जमात (Tabligi Jamaat) से जुड़े सभी 17 विदेशी नागरिकों (Foreign nationals) को बरी कर दिया है. कोर्ट ने 22-22 सौ रुपये के निजी मुचलके पर इन्हें रिहा करने का आदेश दिया है. इन विदेशी नागरिकों को कोरोना फैलाने के आरोप में रांची के हिंदपीढ़ी इलाके से गिरफ्तार किया गया था. करीब तीन महीना रांची के होटवार जेल में बंद रहने के बाद 15 जुलाई को झारखंज हाईकोर्ट से इन्हें जमानत मिली थी. अब सिविल कोर्ट के इस फैसले से इन विदेशी नागरिकों के अपने वतन लौटने का रास्ता साफ हो गया है.

15 जुलाई को हाईकोर्ट से मिली थी बेल 

बता दें कि 15 जुलाई को झारखंड हाईकोर्ट से बेल मिलने के छह दिन तब्लीगी जमात से जुड़े सभी 17 विदेशी नागरिक रांची के होटवार जेल से बाहर निकले थे. इससे पहले रांची सिविल कोर्ट में सभी 17 जमातियों की ओर से 10-10 हजार का दो बेल बाउंड भरा गया था. आठ जून को न्यायायुक्त नवनीत कुमार की अदालत से बेल याचिका खारिज होने के बाद जमातियों ने हाईकोर्ट में अपील की थी. हालांकि बेल मिलने के बाद भी केस समाप्त नहीं होने के चलते इन्हें भारत छोड़ने की इजाजत नहीं मिली थी.



30 मार्च को हुए थे गिरफ्तार
तबलीगी जमात से जुड़े 17 विदेशी नागरिकों को रांची के हिंदपीढ़ी इलाके के बड़ी मस्जिद और मदीना मस्जिद से गिरफ्तार किया गया था. छानबीन के बाद 9 अप्रैल को भादवि की धारा 188, 269, 270, 271 ''द फॉरेनर्स एक्ट 1946'' की धारा 13 14 (बी)(सी) और ''द नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट'' की धारा 51 के तहत इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

बता दें कि इन्हीं 17 विदेशियों में से एक 22 वर्षीय मलेशियाई महिला कोरोना संक्रमित पाई गई थी, जो झारखंड में कोरोना का पहला मामला था.



ये था आरोप

विदेशी नागरियों पर ये आरोप था कि वे टूरिस्ट वीजा पर भारत आये. और यहां आकर धर्म प्रचार करने में जुट गये. देश में कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए लॉकडाउन की घोषणा की गई थी. रांची शहर में धारा-144 लागू था. बावजूद इसके विदेशी नागरिक सरकार के आदेश का उल्लंघन कर धर्म प्रचार में लगे रहे. इसके लिए लोगों को एकत्रित किया.
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