झारखंड कांग्रेस में घमासान, अध्यक्ष रामेश्वर उरांव के खिलाफ विधायकों ने खोला मोर्चा

कांग्रेस के नाराज चार विधायकों के दिल्ली दौरे का मकसद एक व्यक्ति, एक पद के फॉर्मूले को लागू करने के लिए पार्टी आलाकमान पर दबाव बनाना था

दिल्ली दौरा कर राजनीतिक पारा बढ़ाने वाले कांग्रेस के चार विधायक इरफान अंसारी, उमाशंकर अकेला, राजेश कच्छप और ममता देवी वापस झारखंड लौट आए हैं. रांची पहुंचने के बाद कांग्रेस के विधायक इरफान अंसारी ने प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव (Rameshwar Oraon) के खिलाफ हमला तेज कर दिया है. उनका आरोप है कि रामेश्वर उरांव के इर्द-गिर्द गलत लोगों का जमावड़ा है.

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रांची. झारखंड कांग्रेस में कांव-कांव जारी है. रांची से लेकर दिल्ली तक पार्टी के नेता दौड़ लगा रहे है. यह दौड़ आलाकमान की नजर में खुद को सही और सामने वाले को गलत साबित करने को लेकर है. झारखंड कांग्रेस (Jharkhand Congress) अगर दो गुट में बंटा हो तो बात समझ में आती है, पर संगठन और उसके नेता कई गुटों में बंटे हैं. झारखंड कांग्रेस में एक पद, एक व्यक्ति को लेकर अध्यक्ष रामेश्वर उरांव को घेरने की पुरजोर कोशिश हो रही है.

रामेश्वर उरांव (Rameshwar Oraon) पिछले सप्ताह दिल्ली का चक्कर लगाकर अपना किला मजबूत कर आए हैं. दिल्ली दौरा कर राजनीतिक पारा बढ़ाने वाले कांग्रेस के चार विधायक इरफान अंसारी, उमाशंकर अकेला, राजेश कच्छप और ममता देवी वापस झारखंड लौट आए हैं. रांची पहुंचने के बाद कांग्रेस के विधायक इरफान अंसारी ने प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव के खिलाफ हमला तेज कर दिया है. उनका आरोप है कि रामेश्वर उरांव के इर्द-गिर्द गलत लोगों का जमावड़ा है. इसकी शिकायत दिल्ली आलाकमान से की गई है. कांग्रेस के इन नाराज विधायकों के दिल्ली जाने का मकसद एक व्यक्ति, एक पद के फॉर्मूले को लागू करने के लिए पार्टी आलाकमान पर दबाव बनाना था. उनके मुताबिक सभी को मौका मिलना चाहिये, एक व्यक्ति क्यों दो पदों पर रहेगा, इससे संगठन में काम करने वाले लोगों के बीच नाराजगी बढ़ रही है.

इरफान अंसारी हेमंत सोरेन सरकार में 12वें मंत्री पद को लेकर साफगोई से राजनीति करते नजर आ रहे हैं. उनका कहना है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के पास मुख्यमंत्री का पद है, उसके पास विधानसभा अध्यक्ष का भी पद है. ऐसे में जेएमएम को बड़ा दिल दिखाते हुये 12वां मंत्री का पद कांग्रेस की झोली में डालना चाहिये.

दरअसल कांग्रेस विधायक के इस बयान में कहीं न कहीं खुद की दावेदारी का राज छिपा हुआ है. बीतते समय के साथ सरकार पर 20 सूत्री और बोर्ड-निगमों के बंटवारे का दबाव बढ़ने लगा है. जेएमएम भी सहयोगी दलों कांग्रेस और आरजेडी को एडजस्ट करना चाहती है. वैसे यह तभी संभव होगा जब सरकार के अंदर बेहतर तालमेल हो और खटपट की बजाय खामोशी से पदों का बंटवारा हो जाये. हालांकि यहां भी कांग्रेस को ही सबसे ज्यादा मगजमारी करनी होगी, क्योंकि पार्टी का हाथ एक दूसरे के साथ के बजाय खिलाफ में उठने लगा है.

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