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रांची में हर तरफ कचड़े का अंबार, लोग पूछ रहे- कहां है नगर निगम?

राजधानी में कचड़े का अंबार
राजधानी में कचड़े का अंबार

नगर विकास मंत्री सीपी सिंह राजधानी में सफाई व्यवस्था चौपट होने पर दुख जताते हुए कहा कि वे विवश हैं.

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झारखंड की राजधानी रांची में साफ-सफाई भगवान भरोसे है. लाख कोशिशों के बाबजूद नगर निगम राजधानी को साफ रखने में विफल साबित हो रहा है. रांची की सड़कों पर हर तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है.

राजधानी में स्वच्छता अभियान महज दिखावा बन कर रह गया है. हर वर्ष साफ-सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं बाबजूद इसके लोग गंदगी और कचरों के बीच रहने को मजबूर हैं. पीपी कंपाउड हो या मेन रोड या रातु की सड़कें, हर जगह एक सा ही नजारा है.

राजधानी के 53 वार्डों में से 20 में साफ-सफाई नगर निगम स्वयं करता है. वहीं शेष 33 वार्डों की सफाई का जिम्मा एस्सेल इंफ्रा के पास है. सबसे खास बात यह है कि जिस एस्सेल इंफ्रा कंपनी को सफाई का जिम्मा दिया गया है, उसे काम में लापरवाही को लेकर डिबार भी किया जा चुका है. इसके बाबजूद नगर निगम इस पर अब तक कारवाई नहीं कर पाई है.



नगर विकास मंत्री सीपी सिंह राजधानी में सफाई व्यवस्था चौपट होने पर दुख जताते हुए कहा कि वे विवश हैं.
राजधानी को साफ और स्वच्छ रखने के लिए शुरुआत में एटूजेड कंपनी को जिम्मा दिया गया था. उसके बाद दो वर्षों से एस्सेल इंफ्रा कंपनी को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का जिम्मा
दिया गया. मगर शुरुआत से ही अपने कामकाज को लेकर विवादों में रही इस कंपनी ने कभी बेहतर ढंग से साफ सफाई नहीं की. डोर-टू डोर कूड़े के उठाव की बात तो दूर, गली- मुहल्लों और मुख्य सड़कों से भी कचरों को भी समय से नहीं उठाती. इसके कारण आम लोग जहां परेशान हैं, वहीं सरकार इस कंपनी को चेतावनी देकर हर बार छोड़ देती है.

(भुवन किशोर की रिपोर्ट)

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