रांची की बेटी की बड़ी उड़ान: कभी प्रैक्टिस के लिए तीर धनुष नहीं था, लेकिन 2 साल में जीते 36 पदक, अब बैंकॉक की बारी

दीप्ति फिलहाल अगले महीने बैंकॉक में आयोजित होने वाले प्रथम एशिया यूथ तीरंदाजी चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए प्रैक्टिस में जुटी हुई है.

दीप्ति फिलहाल अगले महीने बैंकॉक में आयोजित होने वाले प्रथम एशिया यूथ तीरंदाजी चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए प्रैक्टिस में जुटी हुई है.

Archery in Jharkhand: रांची की रहने वाली दीप्ति कुमारी अब तक 12 नेशनल चैंपियनशिप में कुल 36 पदक जीत चुकी हैं. इनमें 19 गोल्ड, 10 सिल्वर और 8 ब्रॉन्ज शामिल हैं.

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रांची. देशभर में तीरंदाजी (Archery) के खेल में झारखंड की अपनी एक विशेष पहचान रही है. इसी पहचान को आगे बढ़ाती नजर आ रही हैं रांची के जोन्हा की रहने वाली दीप्ति कुमारी. दीप्ति अगले महीने बैंकॉक में आयोजित होने वाले प्रथम एशिया यूथ तीरंदाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पर निशाना साधती नजर आएंगी.

जूनियर भारतीय तीरंदाजी टीम में शामिल 19 साल की दीप्ति इस समय रांची के जोन्हा स्थित बिरसा मुंडा तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र में लक्ष्य साधना पर कड़ी मेहनत कर रही है. दीप्ति की माने तो बैंकॉक में गोल्ड से कम उसे कुछ भी मंजूर नहीं.

दीप्ति बैंकॉक में 2 से 9 मई तक आयोजित प्रतियोगिता में रिकर्व स्पर्धा में 70 मीटर की दूरी से गोल्ड पर निशाना साधेंगी. तीर धनुष से दीप्ति का सामना  पहली बार 2014 में हुआ. तब से लेकर 2019 तक दीप्ति लकड़ी के बने तीर धनुष से ही प्रशिक्षण लेती थी, क्योंकि मुफलिसी की वजह से ड्राइवर पिता के लिए यह मुमकिन नहीं था कि वह परिवार के भरण पोषण करने के साथ-साथ दीप्ति के लिए महंगे रिकर्व तीर धनुष खरीद सकते. ऐसे में बिरसा मुंडा तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र के संरक्षक सुदेश महतो ने 2019 में दीप्ति को महंगा रिकर्व धनुष मुहैया कराया. इसके 2 साल बाद ही दीप्ति ने रिकर्व स्पर्धा में देशभर में अपनी प्रतिभा को साबित कर दिखाया.

दीप्ति अब तक 12 नेशनल चैंपियनशिप में कुल 36 पदक जीती है. इनमें 19 गोल्ड, 10 सिल्वर और 8 ब्रांड शामिल हैं. मार्च में उत्तराखंड में आयोजित 41वीं जूनियर राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में दीप्ति ने टॉप 12 में चौथा स्थान हासिल कर गोल्ड जीता. उसी आधार पर दीप्ति का चयन बैंकॉक एशियन तीरंदाजी प्रतियोगिता के लिए किया गया.
दीप्ति के प्रशिक्षक रोहित बताते हैं कि उसमें सीखने की क्षमता और ग्रहण करने की शक्ति काफी ज्यादा है. उसने रिकर्व स्पर्धा में महज 2 सालों के भीतर ही देशभर के तीरंदाजों को चुनौती देते हुए खुद को स्थापित किया है.

तीरंदाजी में दीप्ति की सफलता और बैंकॉक जाने की खुशी से पूरा परिवार फूला नहीं समा रहा. दीप्ति की मां सुमति देवी की इच्छा है कि जोन्हा फॉल के नाम से चर्चित यह बस्ती भविष्य में दीप्ति के नाम से भी जाना जाए. वही ड्राइविंग का काम करने वाले पिता को भी अपनी बेटी पर काफी गर्व है.
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