Assembly Banner 2021

International Women's Day: रांची की सड़कों पर दौड़ रहे 100 से ज्यादा पिंक ऑटो, महिलाएं महसूस करती हैं सुरक्षित

ऑटो चालक रीना देवी के पिंक ऑटो में बैठकर महिला यात्रियों को सुरक्षा का एहसास होता है

ऑटो चालक रीना देवी के पिंक ऑटो में बैठकर महिला यात्रियों को सुरक्षा का एहसास होता है

शुरू में महिलाओं में इसे लेकर एक हिचक थी पर धीरे-धीरे हिचक खत्म हुई और आज की तारीख में रांची की सड़कों पर 100 से ज्यादा पिंक ऑटो (Pink Auto) दौड़ रही हैं, और सब के सब मेहनतकश महिलाओं द्वारा चलाई जा रही हैं

  • Share this:
रांची. अतंरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) पर महिलाओं के अधिकार और जुझारुपन की कई मिसाल हैं. इसी कड़ी में झारखंड की राजधानी रांची (Ranchi) में पिंक ऑटो वाली दीदी के नाम से पहचान बनानेवाली रीना देवी न सिर्फ अपनी हिम्मत से स्वावलंबी बनी हैं बल्कि महिलाओं के लिए सुरक्षित सफर का साधन भी बन रही हैं. रीना देवी रांची के अरगोड़ा चौक से पिंक ऑटो (Pink Auto) चलाती हैं. पहाड़ी मंदिर के पास रहने वाली रीना के पति अचानक चल बसे तो सात लोगों के परिवार का बोझ उनके कंधों पर आ पड़ी. शुरुआत में वो एक छोटे से प्राइवेट स्कूल में बच्चों को पढ़ाने लगीं लेकिन उससे होने वाली मामूली कमाई से घर चलाना मुश्किल हो रहा था. तब उन्होंने रांची की सड़कों पर ऑटो चलाने का फैसला किया. रीना देवी ने खुद को मजबूत कर ऑटो चलाना सीखा और इस तरह वो पिंक ऑटो चलानेवाली दीदी बन गयीं.

अपने बीते दिनों को याद करते हुए रीना देवी कहती हैं कि वर्ष 2014-15 में जब पति का असमय निधन हुआ तब घर चलाने की जिम्मेवारी उन पर आ गयी. पहले एक निजी स्कूल में पढ़ाना शुरू किया पर वहां सिर्फ 32 सौ रुपये मिलते थे जिससे घर चलाना मुश्किल हो रहा था. ऐसे में उन्होंने ऑटो चलाने की ठानी और इसे सीखने का फैसला लिया. पिंक ऑटो चालक बनकर अब हर महीने वो 15-18 हजार रुपये कमाकर अपने परिवार को भरण-पोषण कर रही हैं, साथ ही अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ा रही हैं.

पिंक ऑटो का सफर कर खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं महिलाएं
ऑटो चलानेवाली रीना ने न सिर्फ अपने परिवार को संभाला बल्कि उन्होंने रांची में उन महिलाओं को भी सुरक्षा का अहसास करवाया जो ऑटो से यात्रा करते वक्त खुद को असुरक्षित महसूस करती थीं. पिंक ऑटो पर हमेशा सफर करनेवाली अरीबा मरियम ने न्यूज़ 18 को बताया कि सामान्यत ऑटो में सफर करते वक्त खुद को थोड़ा असहज और असुरक्षित महसूस करती थी. लेकिन अब वो पिंक ऑटो में बैठकर खुद को बेहतर महसूस करती हैं.
पिंक ऑटो पर सिर्फ महिलाएं ही यात्रा करती हैं. यानी ऐसा ऑटो जो पूरी तरह से महिलाओं को समर्पित है. रीना के जैसी फूलमणी भी ऐसी ही एक महिला ऑटो चालक हैं जो पहले स्कूल में पिउन का काम करती थीं. मगर अब वो भी ऑटो चलाकर 500 से 600 रुपये हर दिन कमा लेती हैं. आदिवासी महिला फूलमणी कहती हैं कि अभी वो भाड़े की पिंक ऑटो चलाती हैं, लेकिन अगर सरकार कर्ज पर ऑटो उपलब्ध करा दे तो उनका जीवन और बेहतर हो सकेगा.



कैसे हुई रांची में पिंक ऑटो की शुरुआत
रांची में पिंक ऑटो शुरू करने का श्रेय अरगोड़ा निवासी समाजसेवी संजय साहू को जाता है जो पहली बार पिंक ऑटो का कंसेप्ट लेकर आए थे. उनकी परिकल्पना महिलाओं के सशक्तिकरण के साथ उनके जीवन स्तर में सुधार लाने की थी. शुरू में महिलाओं में इसे लेकर एक हिचक थी पर धीरे-धीरे हिचक खत्म हुई और आज की तारीख में रांची की सड़कों पर 100 से ज्यादा पिंक ऑटो दौड़ रही हैं, और सब के सब मेहनतकश महिलाओं द्वारा चलाई जा रही हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज