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Jharkhand: क्या सरकारी स्कूलों को निजी हाथों में बेचने का है इरादा? वित्त मंत्री उरांव का आपत्तिजनक बयान

हेमंत सोरेन सरकार में वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के सरकारी स्कूलों पर दिए बयान से अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ नाराज है (फाइल फोटो)

हेमंत सोरेन सरकार में वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के सरकारी स्कूलों पर दिए बयान से अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ नाराज है (फाइल फोटो)

Jharkhand News: अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने प्रदेश के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव के शिक्षा को लेकर दिए गैर जिम्मेदाराना और एकतरफा बयान के लिए उनके इस्तीफे की मांग की है. शिक्षक संघ ने यह भी घोषणा की है कि वो इस बयान के विरोध में अपने हाथों में काला बिल्ला लगाकर स्कूल आएंगे

  • News18Hindi
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रांची. झारखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और प्रदेश के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव (Rameshwar Oraon) की उस टिप्पणी से विवाद खड़ा हो गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि निजी स्कूलों (Private Schools) ने सरकारी स्कूलों (Government Schools) की तुलना में शिक्षा के क्षेत्र में अधिक योगदान दिया है. अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने इस तरह के गैर जिम्मेदाराना और एकतरफा बयान पर उरांव के इस्तीफे की मांग की है. शिक्षक संघ (Teachers Union) ने यह भी घोषणा की है कि वो इस बयान के विरोध में अपने हाथों में काला बिल्ला लगाकर स्कूल आएंगे.

दरअसल रामेश्वर उरांव ने बीते शनिवार को रांची (Ranchi) में एक समारोह में बोलते हुए कहा था कि सरकारी स्कूलों के शिक्षक छात्रों को पढ़ाने पर ध्यान नहीं देते हैं, और अन्य गतिविधियों जैसे ठेकेदारी में बेहतर तरीके से लिप्त हैं. उरांव ने कहा था, ‘मेरा मानना है कि इस देश में शिक्षा के क्षेत्र में निजी स्कूलों का योगदान सरकारी स्कूलों से ज्यादा रहा है, और ऐसा लगता है कि भविष्य में भी ऐसा ही रहेगा.’

BJP ने बयान पर सरकार से अपना रूख स्पष्ट करने को कहा

इस बीच, राज्य बीजेपी ने सत्ताधारी जेएमएम से वित्त मंत्री की टिप्पणी पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणी करने वाले एक वरिष्ठ मंत्री से यह स्पष्ट होता है कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है. उन्होंने कहा, ‘सरकार का काम शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना है, लेकिन ऐसा लगता है कि जेएमएम-कांग्रेस सरकार इस तरह के आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है.’

उन्होंने कहा कि शिक्षा राज्य का विषय है. शिक्षकों के रिक्त पदों को भरना व स्कूलों को आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. बीजेपी अध्यक्ष ने आगे कहा कि रामेश्वर उरांव एक तरफ उर्दू स्कूलों के लिए अनुदान जारी करने के लिए नियमों में ढील देने पर अड़े हैं, वहीं, दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को कोस रहे हैं.

शिक्षक संघ की मांग- बर्खास्त हों वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव

अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष विजेन्द्र चौबे ने घोषणा की है कि राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक गैर जिम्मेदाराना टिप्पणी का विरोध करते हैं. उन्होंने कहा, ‘रामेश्वर उरांव को तुरंत मंत्री पद से बर्खास्त कर देना चाहिए क्योंकि उन्होंने अपनी व्यवस्था के खिलाफ बात की है.’ वहीं, झारखंड पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने भी उरांव के बयान की आलोचना की है जिसमें उन्होंने शिक्षकों के वेतन को रोकने और फंड का उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया था कि हर बच्चा शिक्षा के लिए निजी स्कूलों में जाए.

वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव का इशारा सरकारी स्कूलों को निजी हाथों में बेचने की ओर हो सकता है. केन्द्र की बीजेपी सरकार अंधाधुंध निजीकरण को बढ़ावा दे रही है और सरकारी संपत्तियों को बेच रही है. झारखंड में बीजेपी के विरोधियों की सरकार है और उरांव कांग्रेस के नेता हैं. उधर, राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी की सरकारी संपत्तियों को बेचने की निंदा कर रहे हैं. मगर इधर उनकी ही पार्टी के नेता सरकारी स्कूलों के खिलाफ बोलकर उन्हें बेचने की पृष्ठभूमि तैयार कर रहे हैं. यह दुर्भाग्यपूर्ण है.

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