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रांची गैंगरेप: आरोपियों के गांववालों को सता रहा है डर, न जाने कब पुलिस कर ले गिरफ्तार

News18Hindi
Updated: November 30, 2019, 4:13 PM IST
रांची गैंगरेप: आरोपियों के गांववालों को सता रहा है डर, न जाने कब पुलिस कर ले गिरफ्तार
रांची गैंगरेप: एक ही गांव के रहने वाले हैं सभी 12 आरोपी (प्रतीकात्मक तस्वीर)

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  • Last Updated: November 30, 2019, 4:13 PM IST
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रांची. महिलाओं को आरक्षण, रोजगार और मुफ्त शिक्षा देने का वादा करने वाली पार्टियों में कोई खास हलचल नहीं है. बल्कि अगर यूं कहें कि रांची (Ranchi) की छात्रा के साथ हुई गैंगरेप (Gang Rape) की घटना पर सब चुप्पी साधे बैठे हैं, तो यह भी गलत नहीं होगा. चुनाव का वक्त है. उसके बावजूद खामोशी है. इससे समझ आता है कि गैंगरेप जैसे गंभीर मुद्दे पर बात करना राजनीति में समय व्यर्थ करने जैसा ही माना जाता है. हालांकि इस चुप्पी के बीच रांची शर्मसार है. बल्कि कहना चाहिए कि रांची की छात्रा के साथ हुई गैंगरेप की घटना ने पूरे राज्य को शर्मसार किया है.

एक प्रतिष्ठित कॉलेज के कैंपस से बस कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर एक छात्रा को कुछ बदमाश बंदूक की नोक पर अगवा कर ले जाते हैं और फिर अन्य लड़कों को बुलाकर बर्बरता से गैंगरेप की घटना को अंजाम दे देते हैं. इस बीच प्रशासन केवल मूकदर्शक बना रहता है. सरेआम शाम को अगवा और गैंगरेप करने की ये घटना उसी राज्य की है जहां तमाम तरह के शक्ति कमांडो और हर महिला कॉलेज में टीओपी लगाने की व्यवस्था करने की बात कही गई थी.

हालांकि, पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और स्पीडी ट्रायल का आश्वासन भी दिया है, लेकिन इस बात को कौन नकार सकता है कि एक सुरक्षित झारखंड की बात करने वाला हमारा प्रशासन राज्य की राजधानी में ही फेल हो गया. मंगलवार की घटना के बाद हर तरफ राज्य और प्रशासन व्यवस्था की बदनामी तो हो ही रही है, साथ ही साथ उस गांव की भी हो रही है, जहां के रहने वाले सभी आरोपी थे.

एक ही गांव के रहने वाले हैं सभी 12 आरोपी

घटना में संलिप्त सभी आरोपी संग्रामपुर गांव के रहने वाले हैं. राजधानी रांची से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित कांके के संग्रामपुर गांव में इस घटना की खबर आने के बाद से मातम पसरा है. गांव के लोगों के लिए बुधवार का दिन किसी सदमे से कम नहीं था. एक साथ गांव के 12 लड़कों को पुलिस गिरफ्तार कर के ले जाती है, वो भी गैंगरेप के आरोप में, ये बात गांववालों के लिए पचा पाना मुश्किल हो रहा है. गांव में इक्के-दुक्के लोग ही बाहर दिखाई देते हैं. जो भी लोग दिखते हैं, वो आरोपियों के परिजन ही हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर


क्या कहना है आरोपियों के परिजनों का
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परिजन इस बात पर विश्वास ही नहीं कर पा रहे कि घर का चिराग ऐसी घिनौनी हरकत कर सकता है. आंखों में ममता की पट्टी बांधे कुछ मां अपने बेटे को सही साबित करने में तुली हैं, तो कुछ अपने दिल पर पत्थर रखकर ये भी कह रही हैं कि उनको अपने बेटे की इस हरकत के बाद मर जाने का दिल कर रहा है.

बाकी गांववालों की बात करें तो सभी इस घटना से खुद को अलग रखना चाहते हैं. लोगों में डर का माहौल भी है. न जाने किस बात पर पुलिस गिरफ्तार कर ले.

मौके का जायजा लेने पहुंची गांव की मुखिया डॉ जया भगत ने कहा कि उन्हें खुद आज सुबह इस घटना की जानकारी हुई है. घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वह रुंधे गले से कहती हैं, 'गांव के बच्चे ऐसे होंगे, हमने सोचा नहीं था. जब ये लड़के बाहर की लड़की के साथ ऐसी घिनौनी हरकत कर सकते हैं तो गांव की लड़कियां इनके साथ कितना असुरक्षित महसूस करती होंगी. प्रशासन को जल्द से जल्द कार्रवाई करते हुए दोषियों को सजा देनी चाहिए.'

महिला सुरक्षा की बात करने वाले आज कहां हैं?
बात दो महीने पहले की है. राज्य में चुनावों के मद्देनज़र वोटबैंक साधने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी. भारतीय जनता पार्टी ने महिला वोट बैंक पर खास फोकस करते हुए 'कमल सखी सम्मान समारोह' का आयोजन किया था. जिसमें राज्य के सभी जिलों से पहुंचीं महिलाओं ने सात लाख से ज्यादा राखियां मुख्यमंत्री रघुबर दास को भेंट कीं. तमाम महिलाओं ने इस दौरान मंच पर पहुंचकर रघुबर दास को राखी भी बांधी. बदले में रघुवर दास ने भी अपनी बहनों से एक वादा करते हुए कहा था, 'राज्य की बहनों ने सात लाख रक्षा सूत्र से मुझे बांधा है. आप सभी से वादा है कि आपकी हर मुश्किल, हर परेशानी में आपका ये भाई सदैव आपकी मदद के लिए तत्पर रहेगा. मैं यूं ही झारखंड की माताओं, बहनों और बेटियों की समृद्धि के लिए सदैव प्रयासरत रहूंगा.'

इस तरह की कहानी लगभग देश के हर राज्य की है. इस तरह के वादे हर पार्टी की तरफ से होते रहे हैं. इसमें राजनीतिक पार्टियां इसे मुद्दा बनाने में नाकाम रही हैं, तो हम और आप अपने-अपने घरों में लड़कों को सभ्य बनाए रखने में नाकाम रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मौकों पर कह चुके हैं कि लड़कियों से ज्यादा लड़कों पर नजर रखे जाने की जरूरत है. लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा. चाहे वो पुलिस हो, चाहे राजनीतिक दल, चाहे हम... सभी इस मामले में नाकाम रहे हैं.

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First published: November 30, 2019, 4:10 PM IST
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