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खबरों को छिपाने में यकीन करता है रांची नगर निगम!

खबरों को छिपाने में यकीन करता है रांची नगर निगम!

रांची नगर निगम जिसके अधीन लाखों की आबादी सांस लेती है। शहर की साफ-सफाई से लेकर बिजली-पानी की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी नगर निगम की होती है। जाहिर है निगम की हर गतिविधि पर आम लोगों की नजर होती है। हालांकि, निगम में बैठे अधिकारी सूचनाओं को दबाकर रखने में यकीन करते हैं। यही वजह है कि निगम में बड़ी घटना होने के बाद ही लोगों को इसकी जानकारी मिल पाती है। नगर विकास मंत्री इसे एक गंभीर समस्या मानते हैं।

रांची नगर निगम जिसके अधीन लाखों की आबादी सांस लेती है। शहर की साफ-सफाई से लेकर बिजली-पानी की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी नगर निगम की होती है। जाहिर है निगम की हर गतिविधि पर आम लोगों की नजर होती है। हालांकि, निगम में बैठे अधिकारी सूचनाओं को दबाकर रखने में यकीन करते हैं। यही वजह है कि निगम में बड़ी घटना होने के बाद ही लोगों को इसकी जानकारी मिल पाती है। नगर विकास मंत्री इसे एक गंभीर समस्या मानते हैं।

रांची नगर निगम जिसके अधीन लाखों की आबादी सांस लेती है। शहर की साफ-सफाई से लेकर बिजली-पानी की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी नगर निगम की होती है। जाहिर है निगम की हर गतिविधि पर आम लोगों की नजर होती है। हालांकि, निगम में बैठे अधिकारी सूचनाओं को दबाकर रखने में यकीन करते हैं। यही वजह है कि निगम में बड़ी घटना होने के बाद ही लोगों को इसकी जानकारी मिल पाती है। नगर विकास मंत्री इसे एक गंभीर समस्या मानते हैं।

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रांची नगर निगम जिसके अधीन लाखों की आबादी सांस लेती है। शहर की साफ-सफाई से लेकर बिजली-पानी की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी नगर निगम की होती है। जाहिर है निगम की हर गतिविधि पर आम लोगों की नजर होती है। हालांकि, निगम में बैठे अधिकारी सूचनाओं को दबाकर रखने में यकीन करते हैं। यही वजह है कि निगम में बड़ी घटना होने के बाद ही लोगों को इसकी जानकारी मिल पाती है। नगर विकास मंत्री इसे एक गंभीर समस्या मानते हैं।

खबरें सभी मीडिया हाउसेस तक आसानी से पहुंचें इसे लेकर मेयर और डिप्टी मेयर प्रोपर चैनल बनाने की बात कहते हैं। हालांकि, वे भी मानते हैं कि नगर निगम में जो भी निर्णय लिए जाएं उसे लोगों तक पहुंचाने के लिए मीडिया को सारी जानकारी मुहैया कराई जाए। मेयर ने इस बाबत नगर आयुक्त प्रशांत कुमार से बात करने का आश्‍वासन दिया है।

ये पीड़ा सिर्फ पत्रकारों की नहीं है, बल्कि कई पार्षदों का भी आरोप है कि नगर आयुक्त से मिलने के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है। वार्ड पार्षदों का कहना है कि नगर निगम की अगली बोर्ड या फिर स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में इस मामले को उठाया जाएगा।

नगर निगम अपनी कार्यशैली को लेकर हर दिन अखबारों की सुर्खियां बनता है। घपले-घोटाले निगम की पहचान बनती जा रही है। कैग की रिपोर्ट में फॉल्स बिलिंग को लेकर जो आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं उससे समझा जा सकता है कि निगम के अंदर क्या खेल चल रहा है। ऐसी स्थिति में अगर नए अधिकारी खबरों को छुपाने लगेंगे तो आम जनता में भ्रम की स्थिति पैदा होगी।

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