Ranchi News: आरक्षण की सीमा बढ़ाने के लिए झारखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट में रखेगी अपनी बात

इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लेकर सभी राज्यों से आरक्षण बढ़ाए जाने पर उनका पक्ष मांगा है. (फाइल फोटो)

इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लेकर सभी राज्यों से आरक्षण बढ़ाए जाने पर उनका पक्ष मांगा है. (फाइल फोटो)

हेमंत सरकार (Hemant Sarkar) ने राज्य के निजी संस्थानों में 75% आरक्षण की घोषणा के बाद अब सरकार सरकारी नौकरियों में 50% के आरक्षण की सीमा को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं.

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रांची. झारखंड सरकार ( Jharkhand Government) आरक्षण ( Reservation) पर जल्‍द ही बड़ा फैसला लेने जा रही है. मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने झारखंड विधानसभा (Jharkhand Assembly) के चालू सत्र में आरक्षण से जुड़ी बड़ी घोषणा की है. उन्‍होंने कहा कि राज्‍य में 50 फीसद से अधिक आरक्षण बढ़ाने के लिए राज्‍य सरकार सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखेगी. मालूम हो कि सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों से आरक्षण की सीमा बढ़ाने पर उनका पक्ष मांगा है. इसको लेकर राज्‍य में आरक्षण की सीमा 50 फीसद से अधिक बढ़ाने पर मुख्यमंत्री ने सदन में यह अहम घोषणा की.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बजट पर सरकार की तरफ से जवाब पेश करते हुए सदन में कहा की कई राज्यों ने 50% से ज्यादा आरक्षण की व्यवस्था की थी लेकिन हाई कोर्ट में मामले निरस्त हो गये. अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है. यह विषय चंद राज्यों का नहीं है. झारखंड सरकार आरक्षण की सीमा बढ़ाना चाहती है इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में बात रखी जाएगी.

राज्यों से आरक्षण बढ़ाए जाने पर उनका पक्ष मांगा है

हेमंत सरकार ने राज्य के निजी संस्थानों में 75% आरक्षण की घोषणा के बाद अब सरकार सरकारी नौकरियों में 50% के आरक्षण की सीमा को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं. मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि संविधान के अनुसार 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता लेकिन कई बार राज्य इससे ज्यादा आरक्षण दे देते हैं. फिर यह मामला उच्च न्यायालय से होता हुआ सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाता है. वर्तमान में भी सुप्रीम कोर्ट में ऐसे मामले लंबित हैं. इन्हें देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से उनके विचार मांगे हैं. हालांकि, कुछ राज्य आरक्षण बढ़ाने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय भी गए हैं. जहां यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट की पीठ के समक्ष विचाराधीन है. अतः इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लेकर सभी राज्यों से आरक्षण बढ़ाए जाने पर उनका पक्ष मांगा है.
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