Ranchi News: साइबर अपराधियों का नया पैंतरा, अब खाते से FD कर उड़ा रहे रकम

ओटीपी न बताने पर रकम ठग के खाते में नहीं जा सकती, तो सावधानी ही बचाव है. (सांकेतिक फोटो)

ओटीपी न बताने पर रकम ठग के खाते में नहीं जा सकती, तो सावधानी ही बचाव है. (सांकेतिक फोटो)

साइबर ठगों (Cyber Thugs) द्वारा खाता हैक कर उसमें मौजूद रकम की एफडी बनवा लिया जा रहा है. इसके बाद सायबर अपराधियों द्वारा लोगों को फोन कर उन्हें इस बात की जानकारी दी जाती है.

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रांची. मिलो दूर बैठ साइबर अपराधी (Cyber criminal) लोगों की गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं. और लगातार नए तरीके इजाद कर सायबर फ्रॉड की घटना को अंजाम दे रहे हैं. ऐसी ही एक नया ट्रेंड सायबर अपराधी अपना रहे है. साइबर अपराधी लोगों के खाते में सेंध लगाने के लिए खाता हैक कर एफडी में कन्वर्ट कर रहे हैं. एफडी (FD) करने के बाद खाताधारक की ओटीपी (OTP) मांग कर खाते से रुपये उड़ाए जा रहे हैं. इसे लेकर रांची पुलिस ने अलर्ट जारी कर एक पोस्टर जारी किया है. इस पोस्टर को सभी थानों को प्रचारित करने का भी निर्देश दिया है.

जानकारी के मुताबिक, साइबर ठगों द्वारा खाता हैक कर उसमें मौजूद रकम की एफडी बनवा लिया जा रहा है. इसके बाद सायबर अपराधियों द्वारा लोगों को फोन कर उन्हें इस बात की जानकारी दी जाती है. और वे ओटीपी साझा कर देते हैं. जिसके बाद ग्राहक के खाते से पूरे रकम के साथ अगर बैंक के द्वारा लोन कि भी सुविधा दी गई है तो उसे भी सायबर अपराधियों द्वारा उठा लिया जा रहा है. और जब ग्राहक अपने बैलेंस को देखते हैं तो उन्हें फ्रॉड के बारे में पता चलता है. वहीं, इसे लेकर सीआईडी के सायबर डीएसपी सुमित कुमार का कहना है कि किसी भी सूरत में अपना ओटीपी नंबर किसी को साझा न करें, ताकि आप सुरक्षित रह सकें. वहीं, उन्होंने बताया कि 80% सायबर फ्रॉड के मामले लालच के कारण होते है.

बचाव के तरीके

लोगों का खाता हैक कर उसमें मौजूद रकम की एफडी बनवा लेते हैं. यह एफडी एक दिन के लिए बनती है. लिहाजा उसी दिन या कुछ घंटे बाद उसकी अवधि पूरी हो जाती है. ऐसे में ठग के पास अपना खेल पूरा करने के लिए अधिकतम 12 घंटे होते हैं. वे खाताधारक से ओटीपी पूछते हैं और ओटीपी मिलते ही एफडी से रकम सीधे अपने खाते में ट्रांसफर कर लेते हैं. ओटीपी न बताने पर रकम ठग के खाते में नहीं जा सकती, तो सावधानी ही बचाव है.
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