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Ranchi: प्यास बुझाने में हर घर नल-हर घर जल योजना नाकाम, लोगों तक नहीं पहुंच रहा पानी

घंटों इंतजार के बाद भी ग्रामीणों के हिस्से में जरूरत का पानी नहीं मिल पा रहा है. नल से बूंद-बूंद टपकते जल से इस योजना की विफलता का अंदाजा लगाया जा सकता है

घंटों इंतजार के बाद भी ग्रामीणों के हिस्से में जरूरत का पानी नहीं मिल पा रहा है. नल से बूंद-बूंद टपकते जल से इस योजना की विफलता का अंदाजा लगाया जा सकता है

Jharkhand News: पिठोरिया ग्रामीण जलापूर्ति योजना से करीब 1,500 लोगों के घर नल का कनेक्शन हो चुका है. सरकार की इस योजना का लाभ लेने के लिये 310 रुपये पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के खाते में हर लाभार्थी ने जमा कराए हैं. लेकिन इस योजना को पाकर उन्हें लाभ मिला या वो ठगे गए

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रांची. झारखंड में पाइपलाइन जलापूर्ति योजना का बुरा हाल है. धरातल पर उतरने के बाद भी यह योजना लाभुकों की पहुंच से दूर नजर आ रही है. रांची (Ranchi) के पिठोरिया में पाइपलाइन जलापूर्ति योजना (Pipeline Water Supply) का कुछ ऐसा ही हाल है. यहां घंटों इंतजार के बाद भी ग्रामीणों के हिस्से में जरूरत का पानी नहीं मिल पा रहा है. नल से बूंद-बूंद टपकते जल से इस योजना की विफलता का अंदाजा लगाया जा सकता है.

न्यूज़ 18 की टीम पाइपलाइन जलापूर्ति योजना का सच जानने के लिये रांची के पिठोरिया पहुंची. यहां सामने मौजूद नल के ठीक नीचे 15 लीटर पानी वाला गैलन. नल से गिरते पानी की रफ्तार इतनी धीमी थी कि इस गैलन को भरने में करीब 18 मिनट का समय लग गया. यह हाल है हर घर नल-हर घर जल योजना का. इस योजना का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है मगर ऐसा होता नहीं दिख रहा. स्थानीय निवासी रामदेव सोनी योजना की सफलता से जुड़े सवाल पूछने पर कहते हैं कि यह पानी तो सोना से भी ज्यादा महंगा है. जरूरत के हिसाब से पानी मिलता नहीं, पर विभाग का मीटर हर दिन बढ़ रहा है.

जलापूर्ति योजना से करीब 1,500 लोगों के घर नल का कनेक्शन

पिठोरिया के तेली पाड़ा में हर घर के बाहर नल का स्टैंड पोस्ट दिख जाएगा. पिठोरिया ग्रामीण जलापूर्ति योजना से करीब 1,500 लोगों के घर नल का कनेक्शन हो चुका है. सरकार की इस योजना का लाभ लेने के लिये 310 रुपये पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के खाते में हर लाभार्थी ने जमा कराए हैं. लेकिन इस योजना को पाकर उन्हें लाभ मिला या वो ठगे गए, इसको लेकर विभाग को मंथन करने की जरूरत है. समीना ने कहा कि ना तो पानी के खुलने का समय तय है और ना ही बंद होने का. सुबह से हर नल के नीचे बाल्टी से लेकर पानी के गैलेन लग जाते हैं. लेकिन लंबे इंतजार के बाद एक परिवार के हिस्से में तीन से चार बाल्टी पानी ही मिल पाता है. इसी तरह सचिन कुमार के घर के बाहर पानी का स्टैंड पोस्ट लगा है, पर इससे पानी नहीं मिलता. मजबूरन घर में बोरिंग करवा कर पानी की जरूरत को पूरा किया जा रहा है.

दरअसल पिठोरिया ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत पाइपलाइन का कार्य सही तरीके से नहीं होने से ये असुविधा हो रही है. कहीं नल से पानी की रफ्तार बेहद कम है, तो कहीं लोगों की जरूरत के हिसाब से पानी की आपूर्ति हो जा रही है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में कार्यरत उमेश कुमार का भी मानना है कि इलाका पठारी होने की वजह से ग्रामीणों को दिक्कत हो रही है. हालांकि विभाग का यह भी आरोप है कि कुछ ग्रामीणों द्वारा मोटर पंप का इस्तेमाल किये जाने की वजह से दूसरे लोगों के घर तक जरूरत का पानी नहीं पहुंच पा रहा है.

झारखंड में योजना निर्माण से लेकर उसके चयन और उसकी सफलता को लेकर हमेशा ही सवाल उठते रहे हैं. हर घर नल-हर घर जल योजना का भी कुछ ऐसा ही हाल है. जहां नल और जल दोनों पहुंचने के बाद भी लोगों की प्यास नहीं बुझ पा रही है.

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