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रांची सदर अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाने की कोशिश को लगा धक्का, कंस्ट्रक्शन कंपनी ने खड़े किए हाथ

रांची सदर अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाने की कोशिश को लगा धक्का, कंस्ट्रक्शन कंपनी ने खड़े किए हाथ

रांची सदर अस्पताल में 500 बेड वाला सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाया जाना था.

रांची सदर अस्पताल में 500 बेड वाला सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाया जाना था.

Ranchi Sadar Hospital: विजेता कंस्ट्रक्शन कंपनी को रांची सदर अस्पताल में 500 बेड वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने का काम मिला था. कंपनी ने 200 बेड तो बनाकर सौंप दिए. लेकिन 300 बेड को लेकर तारीख पर तारीख फेल होती गयी. अब कंपनी ने हाथ खड़े कर दिये.

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रांची. रांची सदर अस्पताल (Ranchi Sadar Hospital) को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने की कोशिश को बड़ा धक्का लगा है. विजेता कंस्ट्रक्शन कंपनी ने इस काम को लेकर अपने हाथ खड़े कर लिए हैं. दरअसल झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High court) में सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को काम के संबंध में प्रगति रिपोर्ट एफिडेविट के माध्यम से सौंपने का निर्देश दिया है. लेकिन 25 अगस्त को सौंपे गये प्रगति रिपोर्ट की एफिडेविट में विजेता कंपनी का हस्ताक्षर नहीं है. इसका मतलब साफ है कि विजेता कंपनी अब रांची सदर अस्पताल में काम नहीं करना चाहती.

दरअसल विजेता कंस्ट्रक्शन कंपनी को रांची सदर अस्पताल में 500 बेड वाली सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाने का काम मिला था. कंपनी ने 200 बेड तो बनाकर सौंप दिए. लेकिन 300 बेड को लेकर तारीख पर तारीख फेल होती गयी. कंपनी की ओर से हाईकोर्ट में एफिडेविट कर कई बार अलग अलग तारीख तक काम पूरा करने का भरोसा दिया गया. लेकिन सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का काम हर बार अधूरा ही रहा.

सबसे बड़ी बात यह है कि रांची सदर अस्पताल में अबतक जो 200 बेड सुपर स्पेश्यलिटी के बने हैं. वह भी झारखंड हाईकोर्ट की लगातार सुनवाई और निर्देशों के दबाव की वजह से तैयार हुए. अगर कोर्ट इस मामले में संज्ञान नहीं लेता तो शायद यह भी नहीं हो पाता.

दरअसल इस मामले की पिछली सुनवाई 26 अगस्त को होनी थी. जिसको लेकर 25 अगस्त को शपथ पत्र कोर्ट को सौंप दिया गया था. लेकिन किसी कारणवश मामले की सुनवाई कोर्ट में नहीं हो सकी. अब मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी.

हाईकोर्ट में रांची सदर अस्पताल मामले को लेकर प्रार्थी ज्योति शर्मा ने जनहित याचिका दायर की थी. जिसके बाद इस मामले की सुनवाई नियमित रूप से कोर्ट में होती रही. विजेता कंपनी को 31 दिसंबर 2018 तक 300 बेड वाली सुपर स्पेश्यलिटी अस्पताल बनाकर सौंपना था. लेकिन लगातार देरी की वजह से फरवरी 2019 में प्रार्थी ज्योति शर्मा ने कोर्ट में अवमानना का मामला दायर कर दिया. जिसके बाद हाईकोर्ट ने कोरोना काल में भी लगातार इस मामले की सुनवाई की. हर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और काम करने वाली विजेता कंस्ट्रक्शन कंपनी को हाईकोर्ट की फटकार खानी पड़ी.

विजेता कंस्ट्रक्शन कंपनी 2007 से ही रांची सदर अस्पताल में काम कर रही है. शुरुआत में जब कंपनी ने काम करना शुरू किया था. तब इसका टेंडर 174 करोड़ का था, जो बाद में बढ़कर 300 करोड़ के पार हो गया. इस कंपनी को सुपर स्पेशलिटी के तौर पर सदर अस्पताल में 300 बेड पर ऑक्सीजन प्लांट के जरिए कनेक्शन पहुंचाना था. इसके अलावा कैंटीन, लॉन्ड्री, लिफ्ट, जेनरेटर जैसी कई सुविधाओं से सदर अस्पताल को लैस करना था. लेकिन ऐसा हो नहीं सका. कोरोना की दूसरी लहर में अगर रांची सदर अस्पताल पूरी तरह तैयार होता तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी. साथ ही रिम्स पर भी अनावश्यक दबाव कम होता.

कोरोना की तीसरी लहर को लेकर हाईकोर्ट की ओर से लगातार राज्य सरकार और विजेता कंस्ट्रक्शन कंपनी को जल्द काम करने का निर्देश दिया जाता रहा. लेकिन एफिडेविट में दी गयी तारीख की हर डेडलाइन फेल होती रही. और आखिरकार 25 अगस्त को राज्य सरकार की ओर से सौंपी गयी एफिडेविट में विजेता कंपनी का हस्ताक्षर गायब हो गया.

Tags: Jharkhand news, Ranchi news

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