झारखंड में कोरोना के तीसरी लहर की आशंका! नमूनों की जांच में जिनोम सीक्‍वेंसिंग से खुलासा

झारखंड सरकार द्वारा अप्रैल से नौ जून तक 364 सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए आईएलएस लैब भुवनेश्वर भेजे गए थे (प्रतीकात्मक तस्वीर)

राज्य में जो वैरीएंट मिले हैं उनमें कप्पा अल्फा और अन्य वैरीएंट मिले हैं. झारखंड सरकार (Jharkhand Government) द्वारा पांच जिलों के कोरोना संक्रमितों (Corona Virus) के सैंपल के जीनोम सीक्वेंस से इसका खुलासा हुआ है

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रांची. झारखंड में कोरोना वायरस (Jharkhand Corona Virus) के अब तक सात वैरीएंट मिले हैं. यह सभी वैरीएंट खतरनाक माने जा रहे हैं. इन्हें वैरीएंट ऑफ कंसर्न यानी VOC कहा गया है. झारखंड में कोविड 19 (Covid 19) के सबसे अधिक डेल्टा वैरीएंट (Delta Variant) पाए गए हैं. रिम्‍स के माइक्रोबॉयोलोजी विभाग के प्रमुख डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि आईएलएस भुवनेश्‍वर से रिपोर्ट मिलने के बाद ही कोरोना वायरस के डेल्‍टा प्‍लस वैरीएंट (Delta Plus Variant) की संक्रमण दर का पता लगाया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि वायरस का डेल्‍टा प्‍लस वैरीएंट अधिक खतरनाक साबित हो सकता है.

हालांकि राज्य में जो वैरीएंट मिले हैं उनमें कप्पा अल्फा और अन्य वैरीएंट मिले हैं. झारखंड सरकार द्वारा पांच जिलों के कोरोना संक्रमितों के सैंपल के जीनोम सीक्वेंस से इसका खुलासा हुआ है. सरकार द्वारा अप्रैल से नौ जून तक 364 सैंपल जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए आईएलएस लैब भुवनेश्वर भेजे गए थे. यह सैंपल रांची, जमशेदपुर, धनबाद, हजारीबाग और पलामू शहरों के हैं. भुवनेश्वर में कराए गए जीनोम सीक्वेंसिंग में 328 में वायरस के वैरीएंट पाए गए हैं. इनमें अलग-अलग प्रकार के वैरीएंट हैं. पांच जिलों के 364 सैंपल में से 328 में वैरीएंट ऑफ कंसर्न म्यूटेंट पाया गया है. यह ज्यादा खतरनाक होता है. इस वैरीएंट से मरीजों की मौत हो जाती है. साथ ही फेफड़ों में संक्रमण और ऑक्सीजन के लेवल में कमी आती है.

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने बताया कि 364 सैंपल में सबसे अधिक 194 में डेल्टा वैरीएंट पाए गए हैं. वहीं, 63 में गप्पा, 59 में अल्फा और 32 में अन्य वैरीएंट डिटेक्ट हुए हैं. डेल्टा वैरीएंट की बात करें तो जमशेदपुर में 86, रांची में 26, धनबाद में 32, हजारीबाग में 39 और पलामू में 21 सैंपल में पाए गए हैं. डेल्टा वैरीएंट बहुत तेजी से संक्रमण फैलाता है. उन्होंने कहा कि सरकार इसके लिए तैयार है. कुछ दिन पहले हम लोगों ने बच्चों के निमोनिया को लेकर भी एक अभियान की शुरुआत की है.

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