रांची यूनिवर्सिटी का हाल: मात्र 2 स्थायी शिक्षकों के भरोसे चल रही है 9 जनजातीय भाषाओं की पढ़ाई
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रांची यूनिवर्सिटी का हाल: मात्र 2 स्थायी शिक्षकों के भरोसे चल रही है 9 जनजातीय भाषाओं की पढ़ाई
रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय भाषा विभाग में पिछले 40 साल से शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है.

रांची यूनिवर्सिटी (Ranchi University) के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में कुल 9 भाषाओं की पढ़ाई होती है, लेकिन स्थायी शिक्षक के नाम पर इस विभाग में मात्र दो शिक्षक मौजूद हैं.

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रांची. झारखंड में जनजातीय भाषाओं (Tribal Languages) की पढ़ाई पर सरकारी उदासीनता और अनदेखी का ग्रहण लगता दिख रहा है. हाल ये है कि कुल नौ जनजातीय भाषाओं की पढ़ाई महज 2 स्थाई शिक्षकों के भरोसे चल रही है. वैसे तो रांची यूनिवर्सिटी (Ranchi University) के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में शिक्षकों के 45 पद हैं. लेकिन 38 अनुबंधित शिक्षकों के भरोसे यह विभाग चल रहा है. सिर्फ दो शिक्षक स्थायी हैं. इसके अलावा लाइब्रेरियन और कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति होने पर भी परेशानी हो रही है.

जनजातीय मुद्दों पर राजनीति तो खूब होती रहती है, लेकिन...
झारखंड में जनजातीय मुद्दों पर राजनीति तो खूब होती रहती है, लेकिन जनजातीय भाषाओं की पढ़ाई इस शोरगुल में पीछे ही छूट गई. 1980 में रांची विश्वविद्यालय के अधीन जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में कुल 9 जनजातीय भाषाओं की पढ़ाई शुरू हुई. लेकिन इन 40 वर्षों के सफर के बाद आज कुल 457 छात्रों को पढ़ाने के लिए विभाग के पास महज दो स्थाई शिक्षक हैं. जबकि विभाग में कुल 45 पद सृजित हैं. यानी हर भाषा की पढ़ाई के लिए पांच- पांच शिक्षकों के पद हैं.

विभाग के रिसर्च स्कॉलर छात्र रामकुमार तिर्की, बसंत कुमार और सुनील उरांव बताते हैं कि स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति के बिना गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई संभव नहीं है. क्योंकि अनुबंध पर पढ़ाने वाले शिक्षक भी यहीं के पूर्ववर्ती छात्र रहे हैं. लिहाजा विभाग में पढ़ाई के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है. जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग को सुविधा संपन्न बनाने का भरोसा जरूर दिया गया. लेकिन आज भी विभाग को मूलभूत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.
33 साल में नहीं मिला एक भी प्रमोशन


विभाग के दोनों स्थाई शिक्षक डॉ. उमेश चंद्र तिवारी और विभागाध्यक्ष डॉ. हरि उरांव भी व्यवस्था से काफी नाराज हैं. उनकी मानें तो 33 सालों की सेवा के बाद भी उन्हें एक भी प्रमोशन नहीं मिला है. स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति की बात छोड़ दें तो जनजातीय क्षेत्रीय भाषा विभाग में स्थाई नियुक्ति के नाम पर महज एक ही नन टीचिंग स्टाफ है. हालांकि रांची विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ रमेश पांडे ने बताया कि शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है. और जल्द ही जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग को स्थाई शिक्षक मिल जाएंगे.
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