अपना शहर चुनें

States

कभी मौसम से थी पहचान, आज बिगड़ रही रांची की आबोहवा

कभी अपने खुशनुमा मौसम के कारण रांची की पहचान थी.
कभी अपने खुशनुमा मौसम के कारण रांची की पहचान थी.

प्रकृति ने झारखंड को बहुत कुछ सौगात के रूप में दिया है. लेकिन जल, जंगल और पहाड़ों से भरा यह प्रदेश आज पर्यावरण संकट से जूझ रहा है. हर वर्ष बढ़ता तापमान नया रिकॉर्ड बना रहा तो वाटर लेवेल लगातार गिरने से लोगों की समस्या यहां विकराल होती जा रही है.

  • Share this:
प्रकृति ने झारखंड को बहुत कुछ सौगात के रूप में दिया है. लेकिन जल, जंगल और पहाड़ों से भरा यह प्रदेश आज पर्यावरण संकट से जूझ रहा है. हर वर्ष बढ़ता तापमान नया रिकॉर्ड बना रहा तो वाटर लेवेल लगातार गिरने से लोगों की समस्या यहां विकराल होती जा रही है.

कभी ग्रीष्मकालीन उप राजधानी के रूप में जाना जाने वाली राजधानी रांची प्रकृति की मार झेल रही है. राज्य की अधिकांश नदियों का अस्तित्व संकट में है. पेड़ कट रहे हैं. लोगों को  हर साल बढ़ते तापमान से सामना करना पड़ता है.

लोभ के कारण यह हालात



दामोदर, कोयल, स्वर्ण रेखा...झारखंड की सभी नदियां प्रदूषण की मार झेल रही हैं.

राज्यसभा सांसद हरिवंश की मानें तो यह परिस्थिति मानवीय लोभ के कारण उत्पन्न हुई है. बकौल हरिवंश, जमीन के नीचे का खनिज और ऊपर की हवा पानी बेच रहे लोगों ने झारखंड की प्रकृति नष्ट की है. स्वर्ण रेखा जैसी नदी जहां लोग आज भी सोना तलाशते हैं तो कोयल और दामोदर जैसी नदियां भी संकट में हैं.

पेड़ से आस

अब तक 5 हजार पेड़ लगा कर पर्यावरण  संरक्षण का काम करे अखिलेश अम्बष्ठ का मानना है कि अब लोगों को देर करने के बजाय अपने घर से लेकर बाग बगीचे तक में अधिक से अधिक पेड़ लगाकर कल की भविष्य की चिंता करनी ही होगी.

लोगों की लापरवाही का ही आलम है कि राजधानी रांची के नाक तले हरमू नदी करोड़ों के खर्च के बाद भी बेहाल है.


सरकार के द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए भी कई योजनाएं चलाई जाती हैं. मगर तेजी से हो रही वृक्षों और पहाड़ों की कटाई के कारण सरकार की मशीनरी फेल हो जाती है. मंत्री सी पी सिंह कहते हैं कि अब भी सरकार और जनता सजग होना हो, तभी कुछ हो सकता है. वरना करोड़ों रुपए खर्च करके भी राजधानी रांची के नाक तले हरमू नदी का बेहाल है, इससे बड़ा और क्या उदाहरण होगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज