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राज्यपाल से मिले आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि, रांची समेत पूरे झारखंड में पत्थलगड़ी करने की घोषणा

सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट के पास पत्थलगड़ी की कोशिश की गई.
सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट के पास पत्थलगड़ी की कोशिश की गई.

Pathalgadi in Ranchi: सोमवार को झारखंड के 22 जिलों से आए पड़हा पंचायत के प्रतिनिधियों ने रांची में पत्थलगड़ी की कोशिश की. इससे जिला प्रशासन के हाथ-पैर फूल गये.

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रांची. सोमवार को झारखंड हाइकोर्ट (Jharkhand High court) के सामने पत्थलगढ़ी (Pathalgadi) की कोशिश करने वाले आदिवासी समुदाय (Tribals) के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को राजभवन जाकर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) से मुलाकात की. और संविधान में शेड्यूल एरिया को दिए गये अधिकारों को लागू कराने की मांग की. राज्यपाल से मुलाकात के बाद प्रतिनिधियों ने राजधानी रांची सहित राज्यभर में पत्थलगढ़ी करने की घोषणा की. और दावा किया कि अनुसूचित क्षेत्र में शासन का अधिकार आदिवासियों के पास है.

दरअसल झारखंड हाईकोर्ट परिसर (Jharkhand High court) में सोमवार को उस वक्त हंगामा मच गया, जब सूबे के 22 जिलों से आए पड़हा पंचायत के प्रतिनिधियों ने भारत का राजपत्र खुदा हुआ शिलापट्ट गेट नंबर-1 के पास डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सामने स्थापित करने की कोशिश की. आनन-फानन में पांच थानेदार, डीएसपी, एसडीओ और एसपी मौके पर पहुंचे और 3 घंटे की मशक्कत के बाद उन्हें वहां से समझा-बुझाकर हटाया गया.

शिलापट्ट स्थापित करने पहुंचे पड़हा पंचायत के सदस्यों का कहना था कि संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची पैरा-6 के उप पैरा 2 के तहत आदिवासियों के मिले अधिकारों को यहां की सरकार और अधिकारी लागू नहीं होने देना चाहते हैं. यही वजह है कि यहां के आदिवासी दबे और शोषण के शिकार हो रहे हैं.



आदिवासी समुदाय के लोग ने कहा कि पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत झारखंड के आदिवासियों पर कोई केस मुकदमा लागू नहीं होता है. और उनका कानून भी अलग है. रांची जिला झारखंड राज्य के 5वें अनुसूचित जिला में शामिल है. इसका शासन- प्रशासन और नियंत्रण आदिवासियों के हाथ में हैं. आर्टिकल-13 के तहत यह अधिकार दिया गया है. यह क्षेत्र मुंडा और उरांव लोगों का है. मुंडा और उरांव का क्षेत्र पड़हा व्यवस्था से संचालित होता है.

दरअसल शिलापट्ट पर लिखा था कि रांची, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, लातेहार, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसवां, साहेबगंज, दुमका, पाकुड़ और जामताड़ा अनुसूचित जिले हैं. अनूसूचित जिले में अभी भी झारखंड सरकार का मौजूदा कानून लागू है, जबकि झारखंड सरकार के कानून का विस्तार इन इलाकों में नहीं किया जा सकता है. अनुसूचित क्षेत्रों में आम जनता के लिए भी स्वतंत्रता का अधिकार नहीं है.

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