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चार दशक में करोड़ों खर्च, फिर भी बाघ विहीन हुआ पलामू टाइगर रिजर्व!

News18 Jharkhand
Updated: January 15, 2019, 5:42 PM IST
चार दशक में करोड़ों खर्च, फिर भी बाघ विहीन हुआ पलामू टाइगर रिजर्व!
बाघ विहीन हुआ पलामू टाइगर रिजर्व

विशेषज्ञ नीतीश प्रियदर्शी की माने तो जब से पलामू टाइगर प्रोजेक्ट शुरू हुई, तब से अब तक करीब 123 से ज्यादा बाघ बेतला पार्क से गायब हो गए.

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झारखंड में बाघों के संवर्धन और विकास के लिए पलामू व्याघ्र परियोजना चलाई गई. इस परियोजना पर पिछले चार दशक में अरबों रुपये खर्च किये गए. लेकिन सूबे में बाघों की संख्या बढ़ने के बजाय घटती चली गई. वर्तमान स्थिति ये है कि पलामू के जंगलों में एक भी बाघ नहीं है.

देश में बाघों की कम होती संख्या से चितिंत भारत सरकार ने वर्ष 1973 में बेतला के घने जंगलों में पलामू टाइगर प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी. हर वर्ष पलामू टाइगर प्रोजेक्ट पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है. लेकिन यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को इस बात निराशा रहता है कि उन्हें बाघ देखने को नहीं मिलता. महावत असलम अंसारी भी कहते हैं कि सालों हो गये, यहां बाघ नहीं देख पाए हैं.

वर्ष 2012 के सरकारी आंकड़ें भी बताते हैं कि पलामू टाइगर रिजर्व के कोर और बफर एरिया में बाघ नहीं बचे हैं. राज्य के प्रमुख वन संरक्षक ने भी माना है कि पलामू टाइगर रिजर्व में बाघ नहीं है. वन विभाग की ओर से न्यायालय में दिये गये हलफनामे के मुताबिक पलामू के बाघ छत्तीसगढ चले गए हैं.

विशेषज्ञ नीतीश प्रियदर्शी की माने तो जब से पलामू टाइगर प्रोजेक्ट शुरू हुई, तब से अब तक करीब 123 से ज्यादा बाघ बेतला पार्क से गायब हो गए हैं. वे कहते हैं कि बाघों को ना तो आसमान निगल गया, ना जमीन खा गयी, बल्कि बाघ जंग लगी व्यवस्था के

शिकार हो गये.

नीतीश प्रियदर्शी के मुताबिक जंगली क्षेज्ञ में लोगों की बढ़ती घुसपैठ ने स्थिति बिगाड़ दी है. ऊपर से एंटी नक्सल अभियान के चलते बाघों ने छत्तीसगढ़ का रूख कर लिया. राज्य के प्रमुख वन संरक्षक पीके ‌‌वर्मा कहते हैं कि वर्तमान में पलामू में एक भी बाघ नहीं है. पिछले तीन-चार साल से देखा जा रहा है कि यहां के बाघ कुछ महीनों के लिए छत्तीगढ़ चले जाते हैं और बरसात के बाद वापस लौटते हैं.

सवाल है कि जब देश के अन्य टाइगर रिजर्व एरिया में बाघों की वृद्धि हो रही है, तो पलामू में घट क्यों रही है. जबकि पिछले साल भी पलामू टाइगर प्रोजेक्ट के लिए 30 करोड़ रुपये खर्च किये गये.रिपोर्ट- नीलकमल, विकास व उपेन्द्र कुमार

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First published: January 15, 2019, 5:41 PM IST
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