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खबर का असर: बच्चों की मौत पर जागा रिम्स प्रशासन, शिशु वार्ड में बढ़ेंगे बेड व बेबी वार्मर

Upendra Kumar | News18 Jharkhand
Updated: January 15, 2020, 3:32 PM IST
खबर का असर: बच्चों की मौत पर जागा रिम्स प्रशासन, शिशु वार्ड में बढ़ेंगे बेड व बेबी वार्मर
बीते साल रिम्स में 1150 बच्चों की मौत हो गई. जिसको लेकर अस्पताल कठघरे में है.

रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिंह ने बताया कि पिडियाट्रिक वार्ड को बच्चों के लाइफ सेविंग उपकरणों से लैस किया जाएगा. एनआईसीयू में 24 बेड बढ़ने से इसका फायदा बाहर से रेफर बच्चों को मिलेगा.

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रांची. झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेन्द्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) (RIMS) में बच्चों की मौत (Children Death) की खबर न्यूज-18 पर दिखाये जाने के बाद इसका असर हुआ है. अस्पताल प्रबंधन ने नियोनेटल इंटेसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में 24 बेड बढ़ाने का फैसला लिया है. साथ ही 10 नये बेबी वार्मर लगाने के लिए भी पहल की है. एक हफ्ते में दोनों व्यवस्थाएं कर दी जाएंगी. इसी के साथ एनआईसीयू (NICU) में बेडों की संख्या बढ़कर 50 से अधिक हो जाएगी. बीते साल में रिम्स में 1150 बच्चों की मौत हो गई. जिसको लेकर अस्पताल कठघरे में है.

बच्चों की मौत की खबर सुर्खियों में आने के बाद रिम्स के निदेशक डॉ. डीके सिंह ने पिडियाट्रिक वार्ड, पीडिया सर्जरी और एनआईसीयू की टीम के साथ बैठक की. बैठक के दौरान एनआईसीयू के बेहतर संचालन के लिए 24 बेड और 10 बेबी वार्मर लगाने का फैसला लिया गया. एक सप्ताह के भीतर इन्हें एनआईसीयू में इंस्टॉल कर दिया जाएगा.

वर्तमान में एक बेड पर दो से तीन बच्चों का होता है इलाज

रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिंह ने बताया कि पिडियाट्रिक वार्ड को बच्चों के लाइफ सेविंग उपकरणों से लैस किया जाएगा. उपकरणों की खरीदारी गवर्मेंट मार्केटिंग सिस्टम के तहत की जाएगी. उन्होंने कहा कि एनआईसीयू में 24 बेड बढ़ने से इसका फायदा बाहर से रेफर बच्चों को मिलेगा. वर्तमान में बेड व वॉर्मर की कमी के कारण एक बिस्तर पर ही दो या तीन बच्चों का एकसाथ इलाज किया जाता है. बेड बढ़ाने से इस समस्या से निजात मिलेगी. एनआईसीयू में बेड की संख्या 50 से ज्यादा हो जाएगी.

हाल में बहाल दो नियोनेटोलॉजिस्ट होंगे तैनात

रिम्स निदेशक डॉ. डीके सिंह ने बताया कि एनआईसीयू और पिडियाट्रिक वार्ड का विस्तार किया जाएगा. इसके लिए एनआईसीयू के पास मौजूद सेमिनार सह ट्रेनिंग रूम को नए प्रशासनिक भवन में शिफ्ट किया जाएगा. हाल में बहाल हुए दो नियोनेटोलॉजिस्ट को अतिरिक्त बेड के साथ एनआईसीयू को संभालने का जिम्मा दिया जाएगा. बेड को हाफ-हाफ कर दो यूनिट में बांटा जाएगा. जिससे इसके बेहतर संचालन में मदद मिलेगी.

वर्तमान में शिशु पी-2 वार्ड में जीरो से एक साल तक के बच्चों के लिए लगे वार्मर में से अधिकांश खराब पड़े हैं. रिम्स प्रबंधन को जानकारी होने के बावजूद इनकी मरम्मत नहीं कराई गई. ऐसे में एक वार्मर में एक साथ तीन बच्चों को रखकर इलाज किया जाता है.इस बीच बच्चों की मौत के मामले में राज्य सरकार ने गंभीरता दिखाई है. रविवार को स्पेशल ब्रांच के अधिकारियों ने शिशु वार्ड का जायजा लेकर इसकी जानकारी ली.

रिपोर्ट- उपेन्द्र कुमार

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First published: January 15, 2020, 12:03 PM IST
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