AIDS पीड़ित के साथ RIMS ने किया दिल दुखाने वाला व्‍यवहार

कभी भावनाओं और आंसुओं का मर्म समझने वाला रिम्स इन दिनों विवादों में है. दो दिन से रिम्स में भटक रही एड्स पीड़ित महिला को रिम्स ने ईटीवी के प्रयास के बाद दो दिसंबर को भर्ती किया था. इसके बाद उम्मीद की जा रही थी रिम्‍स के डॉक्‍टर इस मरीज को हर संभव इलाज मुहैया कराएगा, लेकिन उन्‍होंने ऐसा कुछ नहीं किया.

कभी भावनाओं और आंसुओं का मर्म समझने वाला रिम्स इन दिनों विवादों में है. दो दिन से रिम्स में भटक रही एड्स पीड़ित महिला को रिम्स ने ईटीवी के प्रयास के बाद दो दिसंबर को भर्ती किया था. इसके बाद उम्मीद की जा रही थी रिम्‍स के डॉक्‍टर इस मरीज को हर संभव इलाज मुहैया कराएगा, लेकिन उन्‍होंने ऐसा कुछ नहीं किया.

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कभी भावनाओं और आंसुओं का मर्म समझने वाला रिम्स इन दिनों विवादों में है. दो दिन से रिम्स में भटक रही एड्स पीड़ित महिला को रिम्स ने ईटीवी के प्रयास के बाद दो दिसंबर को भर्ती किया था. इसके बाद उम्मीद की जा रही थी रिम्‍स के डॉक्‍टर इस मरीज को हर संभव इलाज मुहैया कराएगा, लेकिन उन्‍होंने ऐसा कुछ नहीं किया.

रिम्स के डॉक्‍टरों और कर्मचारियों ने संवेदनहीनता की सारी सीमाओं को तोड़ दिया. मरीज के परिजन ड्रेसिंग कराने के लिए मरीज को स्ट्रेचर पर लिए छह दिनों से अस्पताल परिसर में घूमते रहे, लेकिन किसी ने ध्‍यान नहीं दिया. डॉक्टर एड्स किट्स नहीं होने का हवाला देकर ड्रेंसिंग टालते रहे. बाद में 200 रुपए लेकर मरीज का आनन-फानन में ड्रेसिंग की गई.

सवंदेनशीलता के साथ नियम भी ताक पर

एक्सपर्ट बताते हैं कि इस तरह आनन-फानन में की गई ड्रेसिंग एड्स पीड़ित मरीज के लिए कहीं से सही नहीं है. एड्स मरीज का ड्रेसिंग स्पेशल किट के साथ और अकेले में किया जाता है ताकि दूसरे मरीज किसी तरह से प्रभावित ना हों. लेकिन रिम्स ने संवेदनशीलता के साथ नियम-कानून और तमाम सावधानियों को ताक पर रख दिया.

पीड़िता की दीदी ने ईटीवी/न्यूज18 रिपोर्टर के सामने साफ शब्दों में कहा कि जब से रिम्स आई हूं, हर काम के लिए पैसे लिए जाते हैं. ड्रेसिंग के लिए भी दो सौ रुपए वसूले गए.

उधर, जब रिम्स उपाधीक्षक डॉक्‍टर कुमारी बसुंधरा से ईटीवी/न्‍यूज18 रिपोर्टर ने जब मामले पर बात की तो पता चला कि रिम्स में एचआईवी किट की कोई कमी नहीं है. एक हजार से ज्यादा किट स्टोर में रखे हैं. स्टोरकीपर के पास किट मांगने के लिए कोई पहुंचा ही नहीं.
इलाज को टालने के लिए सभी एचआईवी किट का बहाना बना रहे थे. पीड़िता की बहन ने भी डॉक्टर की जो रिपोर्ट दिखाई, उसमें स्पष्ट लिखा है की छह दिनों से किट नहीं मिलने की वजह से ड्रेसिंग नहीं हो पाई. यानि रिम्स में सारी चीजें राम भरोसे है.

चिकित्सक अपने हिसाब से काम करते हैं और कर्मचारी पैसा लेकर कुछ भी करने को तैयार होते हैं. उपाधिकक्षक ने माना कि इस मामले में गलती हुई है. उन्होंने पूरे मामले की जांच कर दोषी पर कार्रवाई की बात कही.

उधर सूबे के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने हर बार की तरह एक ही जवाब दिया कि मामले से वे अबतक अवगत नहीं थे और जब ईटीवी/न्‍युज18 ने अवगत कराया है तो वो कड़ी कार्रवाई करेंगे.

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