RIMS में महिला पाई गई कारोना पॉजिटिव, डॉक्टर और प्रबंधन आमने सामने
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RIMS में महिला पाई गई कारोना पॉजिटिव, डॉक्टर और प्रबंधन आमने सामने
रिम्स में डॉक्टर और प्रबंधन के बीच टकराहट की स्थिति पैदा हो गई है. (File Photo)

रिम्स के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में हिंदपीढ़ी की एक महिला की डिलीवरी कराई गई. इसके बाद पता चला कि महिला कोरोना से संक्रमित है. अब डॉक्टरों और प्रबंधन के बीच तनातनी की स्थिति पैदा हो गई है.

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रांची. रिम्स (Rajendra Institute of Medical Sciences) के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में हिंदपीढ़ी (Hindipidhi) की एक महिला की डिलीवरी कराई गई. उस महिला के कोरोना पॉजिटिव (Corona Positive) पाए जाने के दो दिन बाद रिम्स स्त्री एवं प्रसूति रोग पूरी तरह बंद कर दिया गया है. मिली जानकारी के अनुसार विभाग के 100 से ज्यादा डॉक्टर और कर्मचारी प्रबंधन को सूचना देते हुए खुद क्वारेंटाइन (Qurantine) में चले गए हैं. अब रिम्स में डॉक्टर और प्रबंधन में टकराव की स्थिति पैदा हो गई है.

क्या कहते हैं रिम्स अधीक्षक

रिम्स के मेडिकल अधीक्षक डॉ. विवेक कश्यप ने बताया कि क्वारंटाइन में भेजे जाने को लेकर 26 अप्रैल को फैसला लिया जाएगा. डॉ. कश्यप ने कहा कि विभाग में भर्ती मरीजों में कुछ अंजुमन और कुछ सदर अस्पताल चली गई हैं, जबकि कुछ मरीज भर्ती हैं जिन्हें डॉक्टर देख रहे हैं. प्रसूति का काम बंद कर दिया गया है. रिम्स गायनी विभागाध्यक्ष डॉ. अनुभा विद्याथी समेत सभी चिकित्सकों ने रिम्स प्रबंधन को लिखकर दे दिया है कि कोरोना पॉजिटिव महिला पूरे विभाग में लेबर रूम से आईसीयू और वार्ड तक सामान्य मरीज की तरह चार दिनों तक रही. यही कारण है कि विभाग के लगभग सभी चिकित्सक, सभी नर्सें, चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी, ट्रॉली मैन और कक्ष सेवक मरीज के संपर्क में आ चुके हैं जिसके कारण पूरे स्त्री रोग विभाग को लॉकडाउन किया जा रहा है.



14 दिन के लॉकडाउन के बाद शुरू होगा विभाग



विभागाध्यक्ष डॉ. अनुभा विद्यार्थी ने निदेशक डॉ. डी के सिंह को भेजे पत्र में कहा है कि दो सप्ताह का लॉकडाउन समाप्त होने के बाद पर्याप्त मात्रा में पीपीई किट उपलब्ध कराने के बाद ही संदिग्ध गर्भवती महिला के लिए प्रोटोकॉल के तहत कार्य किया जाएगा. संदिग्ध गर्भवती का उपचार पुराने ट्रॉमा सेंटर को पूर्णरूप से कार्यान्वित करने का अनुरोध किया है. इसके साथ ही पत्र में यह कहा गया है कि हॉटस्पॉट हिंदपीढ़ी से आई महिलाओं को प्रसव पूर्व कोरोना टेस्ट कराकर ही विभाग में भेजा जाए.

महिला के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध

डॉ. अनुभा विद्यार्थी ने कहा है कि हिंदपीढ़ी से आई महिला जिसका रिम्स के गायनी विभाग के डॉक्टरों ने मानवता दिखाते हुए सिजेरियन कर जच्चा बच्चा की जान बचाई उसने और उसके परिजनों ने न सिर्फ गलत जानकारी दी बल्कि जानकारी भी छुपाई इसलिए उन पर कार्रवाई होनी चाहिए.

प्रशासन ने भी नहीं दी जानकारी

डॉ. अनुभा विद्यार्थी ने कहा कि मरीज ने कोविड सैंपल देने और हिंदपीढ़ी में रहने की जानकारी भी नहीं दी थी. इसके साथ ही प्रशासन की ओर से भी यह जानकारी नहीं दी गई. इसके चलते बिना पीपीई किट के ही मरीज का सिजेरियन किया गया. सिजेरियन के बाद मरीज चार दिनों तक रिम्स में रही. इस दौरान लेबर ओटी, ट्राईज रूम, लेबर रूम, बाथरूम, वार्ड और शौचालयों का भी एक सामान्य मरीज की तरह उपयोग किया.

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