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कम वेतन को लेकर रिम्स के चिकित्सा शिक्षकों में आक्रोश

कम वेतन को लेकर रिम्स के चिकित्सा शिक्षकों में आक्रोश

राज्य के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल संस्थान रिम्स में मेडिकल शिक्षकों ने अबतक की सरकारों पर उनकी मांगों के प्रति उपेक्षा का आरोप लगाया है। रिम्स टीचर्स एसोसियशन के सचिव डॉ प्रभात कुमार ने कहा कि एक ओर सरकार रिम्स की स्थिति सुधारने की बातें करती है तो दूसरी ओर हकीकत यह है कि उन जैसे चिकित्सक शिक्षकों को ब्लॉक में काम करनेवाले एमबीबीएस चिकित्सकों से भी कम वेतन दिया जाता है।

राज्य के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल संस्थान रिम्स में मेडिकल शिक्षकों ने अबतक की सरकारों पर उनकी मांगों के प्रति उपेक्षा का आरोप लगाया है। रिम्स टीचर्स एसोसियशन के सचिव डॉ प्रभात कुमार ने कहा कि एक ओर सरकार रिम्स की स्थिति सुधारने की बातें करती है तो दूसरी ओर हकीकत यह है कि उन जैसे चिकित्सक शिक्षकों को ब्लॉक में काम करनेवाले एमबीबीएस चिकित्सकों से भी कम वेतन दिया जाता है।

राज्य के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल संस्थान रिम्स में मेडिकल शिक्षकों ने अबतक की सरकारों पर उनकी मांगों के प्रति उपेक्षा का आरोप लगाया है। रिम्स टीचर्स एसोसियशन के सचिव डॉ प्रभात कुमार ने कहा कि एक ओर सरकार रिम्स की स्थिति सुधारने की बातें करती है तो दूसरी ओर हकीकत यह है कि उन जैसे चिकित्सक शिक्षकों को ब्लॉक में काम करनेवाले एमबीबीएस चिकित्सकों से भी कम वेतन दिया जाता है।

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राज्य के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल संस्थान रिम्स में मेडिकल शिक्षकों ने अबतक की सरकारों पर उनकी मांगों के प्रति उपेक्षा का आरोप लगाया है। रिम्स टीचर्स एसोसियशन के सचिव डॉ प्रभात कुमार ने कहा कि एक ओर सरकार रिम्स की स्थिति सुधारने की बातें करती है तो दूसरी ओर हकीकत यह है कि उन जैसे चिकित्सक शिक्षकों को ब्लॉक में काम करनेवाले एमबीबीएस चिकित्सकों से भी कम वेतन दिया जाता है।

डॉ प्रभात कुमार ने कहा कि बातें अब सातवें वेतनमान की हो रही हैं और हमें छठे वेतनमान के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। रिम्स के प्रोफेसर, एसोसियेट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर रैंक के चिकित्सकों की मानें तो सरकार की उपेक्षा के चलते यहां के चिकित्सकों को ग्रामीण इलाकों में सेवा दे रहे चिकित्सा पदाधिकारी से भी कम वेतन पर दोहरा काम करना पड़ता है।

एक ओर जहां उन्हें ओपीडी और इंडोर में रोगियों का इलाज करने की जिम्मेदारियां हैं तो दूसरी ओर एमबीबीएस-पीजी के छात्रों को पढ़ाने के बावजूद भी सैलरी इतनी कम है कि ज्यादातर चिकित्सकों में इसे लेकर आक्रोश हैं।

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