• Home
  • »
  • News
  • »
  • jharkhand
  • »
  • RANCHI ROLE OF RAJ BHAVAN ENDED IN FORMATION OF TAC IN JHARKHAND HERE IS NEW NOTIFICATION JHNJ

झारखंड में TAC के गठन को लेकर राजभवन की भूमिका समाप्त, सरकार ने जारी की नई अधिसूचना

राजभवन से दो बार टीएसी से संबंधित फाइल कुछ आपत्ति के साथ सरकार को लौटा दी गई थी.

Tribal Advisory Committee: नई अधिसूचना के मुताबिक मुख्यमंत्री कमेटी के पदेन अध्यक्ष और सदस्य होंगे. जनजातीय कल्याण विभाग के मंत्री डिप्टी चेयरमैन होंगे.

  • Share this:
रांची. झारखंड में अब ट्राइबल एडवाइजरी कमेटी (TAC) के गठन में राजभवन की भूमिका समाप्त हो गई है. ऐसा टीएसी को लेकर नई अधिसूचना जारी होने के बाद हुआ है. दरअसल हेमंत सोरेन सरकार (Hemant Government) के गठन के बाद टीएसी को लेकर फाइल दो बार राजभवन से कुछ आपत्ति के साथ लौटा दी गई. राजभवन द्वारा कुछ सदस्यों के आचरण प्रमाण पत्र मांगे जाने पर मांडर विधायक बंधु तिर्की ने सवाल उठाए थे. साथ ही राज्य सरकार पर TAC का गठन नहीं कर पाने को लेकर काफी दबाव भी था.

बता दें कि टीएसी का झारखंड के विकास में बड़ा योगदान रहा है. ट्राइबल सब प्लान की राशि को खर्च करने में इस कमेटी की भूमिका सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है.

TAC को लेकर जारी नई अधिसूचना के मुख्य बिंदु   

- एक चेयरमैन, एक डिप्टी चेयरमैन के अलावा 18 सदस्य काउंसिल के सदस्य होंगे.

- मुख्यमंत्री परिषद के पदेन चेयरमैन और सदस्य होंगे. जनजातीय कल्याण विभाग के मंत्री परिषद के डिप्टी चेयरमैन होंगे. सीएम की गैरहाजिरी में परिषद की बैठकों की अध्यक्षता डिप्टी चेयरमैन करेंगे.

- 18 सदस्यों में 15 सदस्य अनुसूचित जनजाति से आने वाले ऐसे विधायक होंगे, जिन्हें मुख्यमंत्री चुनेंगे. इनकी सदस्यता विधानसभा की सदस्यता तक कायम रहेगी.

- परिषद के बाकी बचे तीन सदस्य ऐसे होंगे जिन्हें जनजातीय मामलों में रुचि, विशेष ज्ञान और अनुसूचित जानजाति कल्याण के क्षेत्र का तजुर्बा हो. मुख्यमंत्री की सहमति के बाद ही ऐसे तीन सदस्य परिषद का हिस्सा हो सकते हैं. इनका कार्यकाल मुख्यमंत्री की सहमति से ही बढाया जा सकता है.

- परिषद का कार्यकाल पांच साल का होगा.

- अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रधान या सचिव अथवा कोई अन्य व्यक्ति जिसे सरकार की तरफ चुना जाएगा परिषद के सचिव होंगे.

- परिषद का सचिवालय डॉ. राम दयाल मुंडा जनजाति शोध संस्थान, मोरहाबादी में होगा. इसके सुगम एवं प्रभावी संचालन के लिए संयुक्त सचिव अथवा समकक्ष स्तर के एक अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी.

- झारखंड राज्य में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण एवं विकास हेतु राज्यपाल इस परिषद की सलाह ले सकेंगे.

- परिषद के सदस्यों को सरकार की तरफ से उनके कार्यों के एवज में किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाएगा.

- एक साल में परिषद की कम से कम दो सामान्य बैठकें होंगी. हर बैठक की सूचना दस दिनों पहले सदस्यों को देनी होगी.

- बैठक का कोरम पूरा करने के लिए अध्यक्ष सहित कम से कम सात सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है.