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रांची: मजदूरों की ट्रेन में रोते बच्चे को देख जागी ममता, महिला ASI घर से ले आई दूध की बोतल

नवजात बच्चे की मां को दूध का बोतल देती आरपीएफ की महिला एएसआई.

नवजात बच्चे की मां को दूध का बोतल देती आरपीएफ की महिला एएसआई.

बेंगलुरु से गोरखपुर जा रही ट्रेन (Shramik Express Train) में भूख से बेहाल नवजात को रोते देख हटिया स्टेशन पर तैनात ASI ने अपने बच्चे के हिस्से का दूध देकर पेश की मानवता की मिसाल.

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रांची. बेंगलुरू से गोरखपुर (Gorakhpur) जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन सुबह 6 बजे के करीब हटिया स्टेशन (Hatia Station) पर रुकती है. कुछ लोग ट्रेन से उतरते हैं. तभी एक चार महीने के नवजात के रोने की आवाज बोगी से आती है. कुछ देर में एक महिला गोद में बच्चा लिए बोगी के गेट तक आकर वहां खड़ी एक महिला ASI से भूखे बच्चे के लिए कुछ व्यवस्था करने को कहती है. एक मां की भूख से रोते बच्चे का दर्द को अपना समझ RPF की ASI सुशीला फौरन वहां प्लेटफॉर्म से बाहर निकल स्कूटी से घर जाती है और जल्दी-जल्दी अपने बच्चे के लिए रखा दूध गर्म कर बोतल लेकर स्टेशन पहुंचती है और बच्चा दूध पीकर खेलने लगता है.

नवजात की मां ने दूध का इंतजाम करने को कहा

रविवार को हटिया स्टेशन पर सुबह 6 बजे बेंगलुरु से गोरखपुर जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन संख्या 06563 पहुंची. इस ट्रेन से हटिया स्टेशन पर कुछ लोगों को उतरना था. इस बीच वहां ड्यूटी पर कार्यरत रेल सुरक्षा बल (RPF ) की महिला ASI सुशीला बड़ाइक से मेहरुन्निसा नाम की एक महिला यात्री ने अनुरोध किया कि उसका चार माह का पुत्र भूखा है. यदि उसके लिए दूध की व्यवस्था हो सके तो अच्छा रहेगा.



घर पहुंच कर दूध किया गर्म और स्टेशन तक पहुंचाया
ASI सुशीला बड़ाइक ने तुरंत अपनी स्कूटी उठाई और अपने घर जाकर अपने बच्चों के लिए रखे गए दूध को गर्म किया और जल्दी से स्टेशन पहुंची. महिला एएसआई ने उस महिला को उनके बच्चे के लिए दूध पहुंचाया. महिला श्रमिक ने उन्हें बहुत बहुत धन्यवाद दिया. सुशीला बड़ाइक ने बताया कि -"बच्चा बहुत रो रहा था , मैं भी एक मां हूं, मैं खुद को रोक न सकी.' जानकारी मिली है कि महिला यात्री के पति का नाम सलीम है. जो बिहार के मधुबनी जिले के जमनिया गांव की रहने वाली है.

 

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