होम /न्यूज /झारखंड /वरिष्ठ कवयित्री शैल प्रिया जिनकी कविताओं में महिलाओं ने खुद को पाया

वरिष्ठ कवयित्री शैल प्रिया जिनकी कविताओं में महिलाओं ने खुद को पाया

Jharkhand News: ओ दिसंबरी शाम, आज तुमसे मिल लूं, विदा बेला में अंतिम बार...  यह लाइन है उस कविता की जिसे रांची की वरिष् ...अधिक पढ़ें

  • Local18
  • Last Updated :

    रिपोर्ट : शिखा श्रेया

    रांची. झारखंड की वरिष्ठ कवयित्री शैलप्रिया ने 1 दिसंबर 1994 को महज 48 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कहा था. रांची की लेखिका और स्त्री अधिकारों से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता शैल प्रिया अपनी मार्मिक कविताओं और महिलाओं के अधिकार पर बुलंद आवाज करने के लिए आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है. उनके नाम से शैल प्रिया स्मृति सम्मान भी साहित्यकारों और लेखकों को दिया जाता है. उनकी कहानियां राष्ट्र स्तर पर सम्मानित हिंदी की पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रही हैं.

    शैल प्रिया की सैकड़ों रचनाएं हैं. उन्होंने नारी उत्पीड़न के खिलाफ और नागरिक अधिकारों के लिए लगभग 3 दशकों तक संघर्ष किया ,कई संस्थागत में भागीदारी रही. उनकी कविता जैसे सहेली आज तक लोगों के जेहन में बसी हुई है. क्योंकि कविता इतनी मार्मिक होती की हर महिला की कहानी बन जाती और हर महिला खुद को उस कहानी में ढूँढ लेती.

    लोगों के दिल में उतरती है उनकी कविताएं
    साहित्यकार नीरज नीर ने शैल प्रिया को याद करते हुए कहा कि, इनकी रचना बेहद सहज और सरल भाषा में होती थी जिस वजह से यह पढ़ने वाले के दिल में आसानी से उतर जाया करती हैं. लोग हर कविता के साथ खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते थे. साथी उनकी कविता में जमीनी हकीकत और महिलाओं के हालातों को बड़े मार्मिक तरीके से उतारा गया है जो सीधे दिल को छू जाती है.

    सामाजिक सांस्कृतिक प्रश्नों पर निरंतर क्रियाशील
    शैल प्रिया ने अपनी कविता के माध्यम से समाज में हो रहे नारी उत्पीड़न के खिलाफ और नागरिक अधिकारों के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया. सुरभि, अभिव्यक्ति जागरण, नारी उत्पीड़न विरोधी संघर्ष समिति और महिला मोर्चा के बैनर में सामाजिक सांस्कृतिक प्रश्नों पर हमेशा सक्रिय रही. कई संस्थानों की संस्थापक सदस्य भी रही है. अपने कविता के माध्यम से उन्होंने पीड़ित महिलाओं के दबे हुए आवाज को समाज में फैलाने का काम किया है जिसे याद कर साहित्यकार कलावती सिंह कहती है, मुझे उनकी रचना सहेली आज भी याद है. इतने सरल शब्दों में इतनी सरल भाषा में बड़ी जटिल बात आसानी से समझा जाती है. समाज के मार्मिक मुद्दे पर बेबाकी से उन्होंने अपनी राय रखी और कविता के माध्यम से इस तरह परोसा है कि उन्हें कोई भी पढ़े तो वह उस से जुड़ा हुआ महसूस करेगा यही इनकी कविता की सबसे बड़ी खासियत थी.

    Tags: Jharkhand news, Ranchi news

    टॉप स्टोरीज
    अधिक पढ़ें