झारखंड के 7 जिलों में बिजली के लिए त्राहिमाम, 18 घंटे तक पावरकट, ये है कारण
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झारखंड के 7 जिलों में बिजली के लिए त्राहिमाम, 18 घंटे तक पावरकट, ये है कारण
एमपी में बिजली विभाग की वेबसाइट से आपत्तिजनक मैसेज रिसीव (फाइल फोटो)

जानकारी के मुताबिक डीवीसी का निगम पर नवंबर 2019 तक 4955 करोड़ रुपये का बकाया है. डीवीसी ने 25 फरवरी 2020 तक इस राशि के भुगतान के लिए डेड लाइन दी थी. लेकिन निगम ने भुगतान नहीं किया. अब डीवीसी कमांड एरिया में 18 घंटे तक लोड शेडिंग हो रही है.

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रांची. झारखंड के कई जिलों में बिजली कटौती (Power Cut) को लेकर हाहाकर मचा हुआ है. खासकर डीवीसी (DVC) कमांड एरिया में 18-18 घंटे तक बिजली गायब रहती है. यह स्थिति पिछले दो दिनों से जारी है. बिजली कटौती से सबसे ज्यादा हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, चतरा, बोकारो, गिरिडीह और धनबाद जिले प्रभावित हैं. इन जिलों के 8 लाख उपभोक्ताओं (Consumers) की बिजली के चलते दिनचर्या बिगड़ गई है. कृषि, कारोबार और उद्योग पर भी इसका असर देखा जा रहा है. लोगों में इस स्थिति को लेकर आक्रोश है. जेएमएम (JMM) ने कई जिलों में प्रदर्शन भी किया है.

डीवीसी का 4955 करोड़ रुपये का बकाया

दरअसल दामोदर वैली कॉरपोरेशन (डीवीसी) से बिजली खरीद कर झारखंड बिजली वितरण निगम (जेबीवीएनएल) हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, चतरा, बोकारो, गिरिडीह और धनबाद जिले में बिजली की आपूर्ति करता है. जानकारी के मुताबिक डीवीसी का निगम पर नवंबर 2019 तक 4955 करोड़ रुपये का बकाया है. डीवीसी ने 25 फरवरी 2020 तक इस राशि के भुगतान के लिए डेड लाइन दी थी. लेकिन निगम ने भुगतान नहीं किया. अब डीवीसी कमांड एरिया में 18 घंटे तक लोड शेडिंग हो रही है. इन सात जिलों में 6 सौ के बदले 3 सौ मेगावाट से भी कम बिजली की आपूर्ति हो रही है.



जेएमएम ने रघुवर सरकार को ठहराया जिम्मेदार 
इधर, जेएमएम ने इस बकाये के लिए पिछली रघुवर सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. पार्टी का आरोप है कि रघुवर सरकार में बकाया के बावजूद बिजली नहीं काटी गई. अब सूबे में हेमंत सरकार है तो केन्द्र सरकार डीवीसी के जरिये लोगों को परेशान कर रही है.

सीएम ने डीवीसी पर जताई नराजगी 

सीएम हेमंत सोरेन ने डीवीसी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अन्य राज्यों में बिजली उत्पादक कंपनियों का 20 से 50 हजार करोड़ तक बकाया है, लेकिन वहां बिजली नहीं काटी जाती. झारखंड में पांच हजार करोड़ का बकाया होने पर काटी जा रही है. सरकार इस मामले की बहुत जल्द समीक्षा करेगी और क्या बेहतर हो सकता है, इस पर निर्णय लेगी. बिजली व्यवस्था बेहतर करना सरकार की प्राथमिकता है.

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