झारखंड में Covid-19 : 90 फीसदी वैरिएंट खतरनाक, सबसे ज़्यादा संक्रमण डेल्टा म्यूटेंट से

झारखंड में सेकंड वेव के दौरान डेल्टा वैरिएंट सबसे ज़्यादा संक्रामक रहा.

पांच ज़िलों से लिये गए सैंपलों में वैरिएंट ऑफ कंसर्न म्यूटेंट देखा गया. चूंकि इस म्यूटेंट से मरीज़ों की मौत ज्यादा होती है, फेफड़ों में ज़्यादा संक्रमण और ऑक्सीजन लेवल कम होने की समस्या होती है इसलिए इन्हें खतरनाक माना जाता है.

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    रांची. झारखंड के पांच प्रमुख ज़िलों से कोविड-19 के मरीज़ों के जो सैंपल जुटाए गए थे, उनकी जीनोम सीक्वेंसिंग के बाद पता चला है कि राज्य में सबसे ज़्यादा डेल्टा वैरिएंट से संक्रमण हुआ. राज्य से जितने सैंपल सीक्वेंसिंग के लिए भेजे गए थे, उनमें से 90 फीसदी को खतरनाक वैरिएंट पाया गया, जिन्हें 'वैरिएंट ऑफ कन्सर्न' (VoC) कहा जा रहा है. डेल्टा के अलावा राज्य में, कप्पा और अल्फा वैरिएंट्स भी बड़े तौर पर देखे गए. अन्य प्रकार के वैरिएंट्स 32 सैंपलों में मिले हैं. इनका कोड बी.1 ग्रुप से ही जुड़ा है लेकिन इनके टाइप अलग हैं.

    स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के हवाले से खबरों में कहा गया कि झारखंड की राजधानी रांची के अलावा, जमशेदपुर, धनबाद, हज़ारीबाग और पलामू से अप्रैल व मई के महीनों में लिये गए कुल 364 सैंपलों को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भुबनेश्वर के लाइफ साइन्सेज़ इंस्टीट्यूट भेजे गए थे. इनमें से 328 सैंपलों को VoC श्रेणी का पाया गया. इन सैंपलों में से किस तरह किस वैरिएंट को देखा गया, ये आंकड़े एक बड़ी कहानी कह रहे हैं.

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    न्यूज़18 क्रिएटिव


    56% सैंपलों में डेल्टा वैरिएंट
    झारखंड में स्वास्थ्य विभाग की आईईसी विंग के नोडल अफसर सिद्धार्थ त्रिपाठी ने बताया, '364 सैंपलों में से 56% यानी 204 सैंपलों में डेल्टा वैरिएंट पाया गया, जबकि 63 सैंपलों में कप्पा और 29 में अल्फा वैरिएंट पाए गए. बाकी सैंपलों में अन्य वैरिएंट्स का होना पाया गया. यही नहीं, अन्य ज़िलों से लिये गए सैंपलों को भी भुबनेश्वर की लैब भेजा गया है, जिसके बारे में रिपोर्ट का इंतज़ार है.' बता दें कि राज्य में मार्च के आखिरी सप्ताह से कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का प्रकोप शुरू हुआ था, जो अप्रैल के आखिरी हफ्ते में पीक पर पहुंचा था.

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    29 अप्रैल से 5 मई के बीच झारखंड में कोरोना की सेकंड वेव से भारी तनाव पैदा हुआ था, जब 16.25% तक पॉज़िटिविटी रेट पहुंच गई थी और उसी हफ्ते में सबसे ज़्यादा 951 मौतें हुई थीं. हालांकि एक हफ्ते में सबसे ज़्यादा केस सामने आने का रिकॉर्ड इसके पिछले हफ्ते में रहा था, जब 44,133 नए केस सामने आए थे. गौरतलब है कि अब झारखंड में कोविड संक्रमण का दौर काफी हल्का पड़ चुका है. पाकुड़ ज़िला तो पूरी तरह कोरोना मुक्त घो​षित किया जा चुका है और बीते सोमवार को राज्य में सिर्फ एक कोरोना मौत रिकॉर्ड हुई.

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