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माननियों को भी चाहिए सातवां वेतनमान

माननियों को भी चाहिए सातवां वेतनमान

झारखंड विधानसभा में पिछले कई दिनों से जारी हंगामे के बीच आज अदभूत शांति दिखाई पड़ी. पक्ष - विपक्ष एक नजर आया. ऐसा लगा मानो झारखंड विधानसभा शांति का नया इतिहास लिख रहा हो.

झारखंड विधानसभा में पिछले कई दिनों से जारी हंगामे के बीच आज अदभूत शांति दिखाई पड़ी. पक्ष - विपक्ष एक नजर आया. ऐसा लगा मानो झारखंड विधानसभा शांति का नया इतिहास लिख रहा हो.

झारखंड विधानसभा में पिछले कई दिनों से जारी हंगामे के बीच आज अदभूत शांति दिखाई पड़ी. पक्ष - विपक्ष एक नजर आया. ऐसा लगा मानो झारखंड विधानसभा शांति का नया इतिहास लिख रहा हो.

    झारखंड विधानसभा में पिछले कई दिनों से जारी हंगामे के बीच आज अदभूत शांति दिखाई पड़ी. पक्ष - विपक्ष एक नजर आया. ऐसा लगा मानो झारखंड विधानसभा शांति का नया इतिहास लिख रहा हो.

    मामला यह है

    दरअसल सूबे में जबसे सातवां वेतनमान लागू हुआ है, माननीयों को लगने लगा है कि वे अफसरों से छोटे हो गए. लिहाजा उन्होंने मानदेय बढ़ाने की मांग कर दी. इसके लिए सबसे पहली आवाज सत्ता पक्ष की ओर से ही उठी. इस मांग पर क्या पक्ष और क्या विपक्ष, सब एक सुर में नजर आए. सदन की शांति बरकरार रही.

    स्वहित में काहे का हंगामा

    झारखंड विधानसभा में पहले दिन हंगामा हुआ. दूसरे और तीसरे दिन हंगामा हुआ. राज्यपाल के अभिभाषण और चर्चा और फिर बजट के दौरान भी हंगामा हुआ. लेकिन मंगलवार को जैसे ही भाजपा के विधायक राधाकृष्ण किशोर ने विधायकों के वेतनमान बढाने का मामला उठाया पूरा सदन गलबहियां करने लगा. ना शोर, ना हंगामा. ना विरोध ना प्रतिरोध की आवाज. भाजपा विधायक राधा कृष्ण किशोर कहते हैं कि जनप्रतिनिधियों पर कई तरह की जिम्मेवारी होती है. क्षेत्र के लोगों का आतिथ्य करना होता है. लिहाजा मानदेय बढ़ना चाहिए.

    जनहित मसलों पर विरोध

    मंगललार को सदन में बजट पर चर्चा होनी थी. सदन की कार्यवाही का पहला सत्र सीएनटी - एसपीटी सहित लाठीचार्ज की घटना के विरोध में स्वाहा हो गया. लेकिन दूसरा सत्र जैसे ही शुरू हुआ सत्ता पक्ष की ओर से विधायकों के वेतनमान को बढाए जाने का मामला उठा. इस दौरान सदन में माले विधायक राजकुमार यादव को छोड़कर किसी ने इसका विरोध नहीं किया. वह जाहे जेवीएम हो या फिर कांग्रेस, झामुमो खामोश रहा लेकिन विरोध की आवाज नहीं आयी.जेवीएम विधायक दल के नेता ने भी कुछ किंतु परंतु के साथ मानदेय बढ़ाने की बात को जायज बताया.

    लाख से ऊपर का यह है हिसाब

    विधायकों को फिलहाल 92 हजार वेतनमान मिलता है...दस हजार रुपया हर महीने स्टेशनरी खर्च के लिए मिलता है...पांच हजार रूपया मेडिकल और पांच हजार रुपया मोबाईल के लिए मिलता है साथ ही सत्र के दौरान हर दिन तीन हजार रुपए मिलते हैं. साथ ही चुनाव जीतने पर फर्नीचर के लिए सवा लाख और लैपटॉप के लिए अस्सी हजार रुपये मिलते हैं. साथ ही यात्रा भत्ता और दैनिक भत्ता अलग से मिलता है, लेकिन विधायकों को लगता है ये सब कम है. महंगाई में पोसाई नहीं पड़ता.

     

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