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झारखंड के शशिधर आचार्य और मधु मंसूरी को मिला पद्मश्री पुरस्कार, कल छुटनी देवी होंगी सम्मानित

झारखंड के शशिधर आचार्य और मधु मंसूरी को मिला पद्मश्री पुरस्कार, कल छुटनी देवी होंगी सम्मानित

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों पद्मश्री पुरस्कार लेते नागपुरी गीतकार मधु मंसूरी हंसमुख

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों पद्मश्री पुरस्कार लेते नागपुरी गीतकार मधु मंसूरी हंसमुख

President Kovind conferred Padma Awards: राष्ट्रपति भवन के दरबार हाल में आयोजित भव्य समारोह में झारखंड के छऊ गुरू शशिधर आचार्य और नागपुरी गीतकार मधु मंसूरी हंसमुख को पद्मश्री पुरस्कार दिया गया. इन दोनों को वर्ष 2020-21 के लिये इस सम्मान के लिए चुना गया. दोनों को यह पुरस्कार देने की घोषणा 2020 में की गयी थी.

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रांची. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कला क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए झारखंड के दो विभुतियों को आज पद्म सम्मान देकर सम्मानित किया. राष्ट्रपति भवन के दरबार हाल में आयोजित भव्य समारोह में छऊ गुरू शशिधर आचार्य और नागपुरी गीतकार मधु मंसूरी हंसमुख को पद्मश्री पुरस्कार दिया गया. इन दोनों को वर्ष 2020-21 के लिये इस सम्मान के लिए चुना गया. दोनों को यह पुरस्कार देने की घोषणा 2020 में की गयी थी. इनके अलावा 2021-22 के लिये छुटनी देवी को पद्मश्री से कल सम्मानित किया जायेगा. उनके नाम की घोषणा इसी साल 26 जनवरी को की गयी थी.

मधु मंसूरी: रातू के सिमलिया के रहने वाले मधु मंसूरी को नागपुरी गीतों का राजकुमार कहा जाता है. अपनी गीत और मधुर आवाज से वे देश-विदेश में झारखंड को पहचान दिला चुके हैं. जल-जंगल-जमीन बचाने से लेकर झारखंड आंदोलन तक के लिए इन्हीं के लिखे गीत सर्वाधिक गाये गये.

शशिधर आचार्य: सरायकेला-खरसांवा के रहने वाले शशिधर आचार्य ने छऊ नृत्य को बिहार, बंगाल, झारखंड और ओडिशा समेत देश-विदेश में प्रसिद्धि दिलाने में अहम भूमिका निभाई. छऊ मुख्य रूप से सैन्य नृत्य है, जिसे सैनिक किया करते थे. शशिधर के पिता गुरु लिंगराज आचार्य ने उन्हें इस नृत्य की बारीकियों से परिचित कराया.

छुटनी देवी: सरायकेला- खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड के भोलाडीह गांव की रहने वाली छुटनी देवी को कल पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा. छुटनी देवी को कभी डायन कह कर घर-गांव से निकाल दिया गया था. जिसके बाद वह आठ माह के बच्चे के साथ पेड़ के नीचे रहीं. तब पति ने भी साथ छोड़ दिया. आज वह अपनी जैसी असंख्य महिलाओं की ताकत बन गई है. गांव में ही एसोसिएशन फॉर सोशल एंड ह्यूमन अवेयरनेस (आशा) के सौजन्य से पुनर्वास केंद्र चलाती हैं.

कर्नल जय प्रकाश: सेना मेडल प्राप्त नाइन-डोगरा के लेफ्टिनेंट कर्नल जय प्रकाश कुमार को 13 नवंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ‘तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार 2020’ से सम्मानित करेंगे. लेफ्टिनेंट कर्नल जय प्रकाश फुसरो बोकारो के रहने वाले हैं. वर्ष 2019 में विश्व की सबसे ऊंची पर्वत शृंखला माउंट एवरेस्ट अभियान के तहत 8848 मीटर फतह करने के लिए उन्हें यह सम्मान दिया जा रहा है. माउंट एवरेस्ट अभियान 16 मई 2019 को 08:30 बजे पूरा किया था. कर्नल जय प्रकाश बीते 13 वर्षों में 38 से अधिक पर्वत शृंखलाओं को फतह कर चुके हैं.

Tags: Jharkhand news, Padma awards, President Ramnath Kovind

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