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हैरान करने वाली खबर! झारखंड में आदमी का घर सस्ता जानवरों का घर महंगा

हैरान करने वाली खबर! झारखंड में आदमी का घर सस्ता जानवरों का घर महंगा

झारखंड में गरीबों के घर बनाने में प्रति वर्ग फीट 444 रुपये खर्च आते हैं, जबकि पशु शेड के लिए ये खर्च 700 से 800 रुपये तक होता है.

झारखंड में गरीबों के घर बनाने में प्रति वर्ग फीट 444 रुपये खर्च आते हैं, जबकि पशु शेड के लिए ये खर्च 700 से 800 रुपये तक होता है.

Jharkhand News: झारखंड में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में गरीबों के घर के लिए प्रति वर्ग फीट करीब 444 रुपये का खर्च आता है. जबकि सूकर शेड निर्माण पर खर्च प्रति वर्ग फ़ीट करीब 861 रुपये, बकरी शेड निर्माण पर खर्च प्रति वर्ग फ़ीट करीब 798 रुपये, मुर्गी शेड निर्माण पर खर्च प्रति वर्ग फ़ीट करीब 785 रुपये, पशु (गाय) शेड निर्माण पर खर्च प्रति वर्ग फ़ीट करीब 671 रुपये आते हैं.

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रांची. झारखंड में आदमी का घर सस्ता और जानवर का घर महंगा बन रहा है. ये हाल सरकारी योजनाओं की है. इस सच्चाई को प्रधानमंत्री आवास योजना की तय राशि और पशु शेड निर्माण की तय राशि से बखूबी समझा जा सकता है. मनरेगा के तहत पशु के नाम पर स्वीकृत योजना की लागत प्रधानमंत्री आवास योजना से कही ज्यादा है.

झारखंड विकास योजनाओं को लेकर हमेशा से ही चर्चा में रहा है. इस वक्त भी सरकार की योजना को लेकर चर्चा हो रही है. आदमी का घर सस्ता और जानवर का घर महंगा. आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये कैसे संभव है, तो आपको बता दें कि ये सरकारी की योजनाओं से संभव है. इसको समझने के लिये पहले इसे समझ लीजिये.

झारखंड में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में प्रति वर्ग फीट करीब 444 रुपये का खर्च होता है. जबकि पशु शेड की श्रेणी पर नजर दौड़ाएं तो सूकर शेड निर्माण पर खर्च प्रति वर्ग फ़ीट करीब 861 रुपये, बकरी शेड निर्माण पर खर्च प्रति वर्ग फ़ीट करीब 798 रुपये, मुर्गी शेड निर्माण पर खर्च प्रति वर्ग फ़ीट करीब 785 रुपये, पशु (गाय) शेड निर्माण पर खर्च प्रति वर्ग फ़ीट करीब 671 रुपये आते हैं. ये तमाम योजनाएं मनरेगा के तहत संचालित हो रहे हैं.

ऐसा सिर्फ सरकारी फाइलों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर आकार ले चुकी योजनाओं के शिलापट पर अंकित हो चुकी है. रांची का आरा- केरम गांव मनरेगा के द्वारा संचालित योजना का हब माना जाता है. साल 2018 में गांव के रमेश बेदिया को गाय शेड निर्माण के नाम पर 2 लाख 72 हजार रुपये की योजना दी गई. 27 फ़ीट लंबा और 25 फ़ीट चौड़ा इस शेड में कुल 10 गाय को रखने का प्रावधान है. दो बैल बेंच कर दो गाय से शुरू हुई गाय पालन का ये सिलसिला 10 गाय तक पहुंच गया है.

ये है मनरेगा के तहत तैयार बकरी शेड

बकरी शेड की लंबाई 12 फ़ीट और चौड़ाई 10 फ़ीट है. इस छोटे से कमरे का 63 हजार 100 रुपया प्राक्कलन राशि है. पैरों देवी को साल 2018 में बकरी शेड की योजना मिली. रोजगार के लिहाज से पैरों ने बकरी पालन को बेहतर तरीके से संचालित करते हुए. अब इससे मुनाफा कमाना भी शुरू कर दिया है. तीन से 5 हजार रुपये में उनकी बकरी बिक रही है, जबकि बकरे की कीमत 12 हजार से 20 हजार तक है.

झारखंड में सूकर शेड निर्माण पर सबसे ज्यादा खर्च किया जा रहा है. ये योजना भी मनरेगा के तहत ही पूर्ण हो रही है. सूरज करमाली को सूकर शेड के नाम पर 4 लाख 50 हजार की योजना साल 2018 में मिली. 49 फ़ीट लंबे और 30 फ़ीट चौड़े इस सूकर शेड से सूरज की जिन्दगी में बड़ा बदलाव हो चुका है. सूकर पालन की बदौलत अच्छी आमदनी हो जाती है. छोटा सूकर की ज्यादा डिमांड है. सूरज दो माह में सूकर का 80 के करीब बच्चा बेंच चुके है. एक बच्चे की कीमत 25 सौ के आस- पास है.

आरा – केरम गांव में ही आपको प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना भी देखने को मिल जाएगी. प्रधानमंत्री आवास की दीवार पर योजना का प्राक्कलन राशि 1 लाख 30 हजार भी अंकित है. गांव के लोग भी योजना निर्माण के दौरान सरकार के इस निर्णय से हैरान है. लेकिन वो कर भी क्या सकते हैं. सीमा देवी बताती है कि ये बात जरूर है कि पशु शेड योजना लोगों के रोजगार से जुड़ा है और आवास बस निवास तक ही सीमित है.

प्रधानमंत्री आवास योजना की बात करें या मनरेगा के तहत बनने वाले पशु शेड की. योजना पर खर्च होने वाली राशि में बड़ा अंतर कई तरह के सवाल पैदा करता है. सरकार को संभवतः इस पर गौर करना चाहिये, क्योंकि अब लोग इस तरह की योजना को लेकर चर्चा करने लगे हैं.

Tags: Jharkhand news

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