झारखंड : बड़े लक्ष्य के लिए बनी थी स्पेशल 40 फोर्स, लेकिन कोरोना से हुई बेबस!

झारखंड पुलिस की एक विशेष टीम बनाई गई थी.

झारखंड पुलिस की एक विशेष टीम बनाई गई थी.

इस टीम को प्रदेश भर के पेंडिंग कांडों के डिस्पोज़ल के लिए इस वादे के साथ मैदान में उतारा गया था कि कोई एक्स्ट्रा ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी, लेकिन स्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि इस टीम के हाथ नाकामी ही लगी.

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रांची. प्रदेश भर के थानों में सैकड़ों की संख्या में जो केस पेंडिंग चल रहे थे, उन्हें निपटाने के लिए स्पेशल 40 का गठन किया गया था. इस खास टीम को 3 महीने के भीतर करीब 400 लंबित मामलों में नतीजे तक पहुंचने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन कोरोना संक्रमण की मार ऐसी रही कि दिए गए वक्त के भीतर यह टीम सिर्फ 60 केसों का ही निपटारा कर सकी. यानी यह टीम अपने लक्ष्य का करीब 15 फीसदी ही हासिल कर सकी और इतने कम सक्सेस रेट के पीछे कारण कोविड 19 के चलते जो हालात बने, उन्हें ही बताया गया.

तीन महीने के भीतर 400 केसों के निपटारे के लिए यह जो खास टीम बनाई गई थी, तीन महीने बाद जब उसका आकलन हुआ तो यह प्रयोग नाकाफी साबित हुआ. कुछ जानकारों ने यह भी माना कि इस प्रयोग की टाइमिंग अनुकूल नहीं रही. आखिर क्यों यह प्रयोग किया गया और इसके नाकाम होने पर किस तरह की प्रतिक्रियाएं आईं, जानिए.

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झारखंड में स्पेशल 40 को कोरोना के हालात में ड्यूटी पर लगाया गया था.

कहा गया था कुछ लेकिन...

'न कोई ट्रांसफर, न ही लॉ एंड आर्डर में ड्यूटी' के सिद्धांत पर इस टीम का गठन किया गया था लेकिन इसका परफॉर्मेंस अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा. वहीं, रांची के सिटी एसपी ने कहा कि इस सिद्धांत के अनुरूप व्यवस्था नहीं मिली. यह भी अहम है कि मार्च महीने में इस टीम को राजधानी के 5 हज़ार लंबित मामलों के बोझ को कम करने को लेकर स्पीहल टॉस दिया गया था. 40 एसआई को इस कार्य में लगाया गया था. इनकी मदद के लिए 3 सर्किल इंस्पेक्टर और मामलों की मॉनिटरिंग के लिए संबधित डीएसपी को भी इस टीम में डेप्युट किया गया था.

'कोरोना के कारण टीम की ड्यूटी लगी'



पूरे मामले पर रांची के सिटी एसपी सौरभ ने कहा कि मार्च में टीम को ज़िम्मेवारी मिली थी. टीम ने उसके हिसाब से काम भी किया लेकिन कोरोना के प्रकोप के चलते टीम को कोविड गाइडलाइन और लोगों की सहायता जैसे कामों में लगाया गया क्योंकि कई पुलिसकर्मी संक्रमित हो गए थे और मैनपावर की कमी थी. उन्होंने कहा कि स्पेशल टीम ने सही मायनों में एक महीने ही काम किया. एसपी के मुताबिक फिर इस टीम को धार दी जा रही है ताकि केसों का डिस्पोज़ल जल्द हो सके.

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