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झारखंड में नहीं की गई Coronavirus संदिग्ध की जांच, कहीं महंगी न पड़ जाए यह लापरवाही
Ranchi News in Hindi

Upendra Kumar | News18 Jharkhand
Updated: March 29, 2020, 10:45 AM IST
झारखंड में नहीं की गई Coronavirus संदिग्ध की जांच, कहीं महंगी न पड़ जाए यह लापरवाही
गीलिड के भारत में तीन पेटेंट हैं. यह पेटेंट भारत के पास 2009 से ही हैं. जब से इबोला के इलाज के लिए रेमडेसिवीर दवा का निर्माण शुरू हुआ था. कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं में रेमडेसिवीर एकमात्र ऐसी दवा है जिसे दुनिया के कई देशों ने मंजूरी दी है. कंपनी गीलिड की ओर से कहा गया है कि दवाइयों की पहुंच को बढ़ाने के लिए कंपनी द्वारा भारत और पाकिस्तान में स्थित 5 जेनेरिक दवा निर्माताओं के साथ गैर-विशिष्ट लाइसेंसिंग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. गीलिड की ओर से यह भी कहा गया है कि इससे कंपनी को विश्व के 127 देशों के लिए रेमडेसिवीर बनाने और उन्हें बेचने की इजाजत मिलेगी.

हैदराबाद (Hyderabad) से बुखार और खांसी के साथ लौटे युवक की जांच तक नहीं की गई.

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रांची. झारखंड (Jharkhand) देश के उन चंद राज्यों में से एक है, जहां अभी तक कोरोना वायरस (Coronavirus) का एक भी पॉजिटिव केस नहीं मिला है. लेकिन क्या आने वाले दिनों में झारखंड इससे अछूता रह पाएगा? यह एक बड़ा सवाल है. एक ओर जहां सरकार और स्वास्थ्य महकमा झारखंड में कोरोना वायरस के लिए नो एंट्री जोन बनाने की दिन-रात कोशिश कर रहे हैं, तो दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग के ही कुछ डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ इस महामारी से निपटने में लापरवाही बरत रहे हैं.

बड़ी लापरवाही आई सामने
प्रदेश के गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड के कलहंजरी गांव के अजय कुमार 23 मार्च को हैदराबाद से लौटे. जिस समय वे हैदराबाद से गांव लौटे उस समय उन्हें खांसी, सर्दी और बुखार था. कलहंजरी गांव के मुखिया देवनाथ की मानें तो उस समय भी अजय डॉक्टर से दिखाने पीएचसी गया था. नियम से उसकी जांच होनी चाहिए थी, परंतु डॉक्टर ने उसे घर भेज दिया. इसके बाद 28 मार्च को जब उसकी तबीयत बिगड़ गई तो परिवार वाले फिर ममता वाहन से उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर आए, जहां डॉक्टरों ने बिना देखे उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया, लेकिन वहां से सदर भेजने की कोई व्यवस्था नहीं थी. थक हार कर बाइक से उसे वापस गांव लौट जाना पड़ा. ऐसे में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है.

क्या कहते हैं गिरिडीह के सिविल सर्जन?



गिरिडीह के सिविल सर्जन डॉ. अवधेश सिंह ने बताया कि, ‘बिरनी PHC में 6 डॉक्टर की जगह 01 डॉक्टर है. कोरोना वायरस का नाम सुनते ही कोई एम्बुलेंस वाला जाने के लिए तैयार नहीं होता. पीड़ित से कहिए कि वह सदर अस्पताल आ जाए तो उसका इलाज और जांच करवा देंगे. उनके जवाब से सवाल उठता है कि कैसे 21 दिन लॉकडाउन रह कर, हम कोरोना को परास्त कर पाएंगे.’



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First published: March 29, 2020, 9:07 AM IST
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