पहली बार फ्लाइट से प्रवासी मजदूरों की वापसी, मुंबई से झारखंड लौटेंगे 180 लोग
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पहली बार फ्लाइट से प्रवासी मजदूरों की वापसी, मुंबई से झारखंड लौटेंगे 180 लोग
मुंबई में मजदूरों को लेकर एक फ्लाइट रांची के लिए रवाना हुई है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर प्रदेश के मजदूरों (Laborers) को चार्टड प्लेन (Chartered Plain) से वापस लाने की अनुमति मांगी थी. केन्द्र ने इसकी मंजूरी दे दी है.

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रांची. झारखंड सरकार (Jharkhand Government) के प्रयास और एलुमनाई नेटवर्क ऑफ नेशनल लॉ स्कूल बेंगलुरु के सहयोग से एयर एशिया की फ्लाइट से आज सुबह 8:15 बजे झारखंड के 180 प्रवासी मजदूर (Laborers) मुंबई से रांची एयरपोर्ट पहुंचेंगे. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन (Hemant Soren) ने इसके लिए एलुमनाई नेटवर्क ऑफ लॉ स्कूल की सराहना की है.

हवाई जहाज से प्रवासी मजदूरों की घर वापसी पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुशी जताते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता में मजदूरों की सकुशल घर वापसी कराना है. इसको लेकर कई तरह के प्रयास किये जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि जल्द ही लद्दाख और अंडमान निकोबार में फंसे झारखंडी मजदूरों को भी सरकार फ्लाइट से वापस लाएगी.

दरअसल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आग्रह को मानते हुए केन्द्र ने हवाई जहाज से मजदूरों को लाने की स्वीकृति दे दी है. और इस मंजूरी के बाद पहली बार 180 मजदूरों मुम्बई से एयर एशिया के विमान से रांची लाये जा रहे हैं. राज्य के श्रममंत्री सत्यानंद भोक्ता ने इसका स्वागत करते हुए कहा है कि जो भी मजदूर यहां आ रहे हैं, उन्हें रोजगार भी सरकार मुहैया करायेगी. उन्होंने कहा कि अबतक दो लाख प्रवासी झारखंड आ चुके हैं.



सीएम हेमंत ने गृह मंत्रालय से मांगी थी इजाजत 
बता दें कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय गृह मंत्रालय अमित शाह को पत्र लिखकर प्रदेश के प्रवासी मजदूरों को चार्टड प्लेन से वापस लाने की अनुमति मांगी थी. पत्र में लद्दाख, अण्डमान निकोबार और नार्थ ईस्ट में फंसे मजदूरों को चार्टर्ड प्लेन से वापस लाने की अनुमति मांगी थी. झारखंड सरकार का कहना था कि लद्दाख, अण्डमान और नार्थ ईस्ट में फंसे मजदूरों को बस या ट्रेन से लाना संभव नहीं. ऐसे में इन इलाकों से मजदूरों को चार्टर्ड प्लेन से लाने की अनुमति मिलती, तो उनकी सुरक्षित घर वापसी कराई जा सकती है. गत 12 मई को सीएम ने पत्र लिखकर अनुमति मांगी थी. जिस पर गृह मंत्रालय से मंजूरी दे दी गई है. जानकारी के मुताबिक लद्दाख में करीब 200 और उत्तर-पूर्वी राज्यों में करीब 450 झारखंडी श्रमिक फंसे हुए हैं.

इनपुट- उपेन्द्र कुमार, भुवन किशोर झा

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