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Analysis: तेलंगाना के CM के. चन्द्रशेखर राव की CM हेमंत सोरेन से मुलाकात के क्या हैं मायने?

तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने शुक्रवार को रांची पहुंच कर झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी

तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने शुक्रवार को रांची पहुंच कर झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी

Jharkhand News: जहां तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव की मोर्चेबंदी का सवाल है, तो बीजेपी विरोधी मोर्चे के साथी के रूप में दोनों के एक साथ आने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन समस्या तब आएगी, जब उस मोर्चे से कांग्रेस को बाहर रखने की बात आएगी

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रांची. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव (केसीआर) के संबंध बीजेपी से खराब हुए हैं, जिसके बाद वो देश में बीजेपी विरोधी मोर्चा (Anti BJP Morcha) बनाने की मुहिम में जुट गए हैं. लेकिन, उनके प्रस्तावित मोर्चे की विशेषता यह होगी कि उसमें कांग्रेस को नहीं रखा जाएगा. अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए वो अलग-अलग राज्यों के बीजेपी विरोधी नेताओं से लगातार संपर्क कर रहे हैं. इस सिलसिले में शुक्रवार को केसीआर (KCR) ने रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) से मुलाकात की. उसके पहले वो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से भी बैठक कर चुके हैं. पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) से भी उनकी बात हो चुकी है.

जहां तक हेमंत सोरेन के साथ के. चन्द्रशेखर राव (K Chandrashekar Rao) की मोर्चेबंदी का सवाल है, तो बीजेपी विरोधी मोर्चे के साथी के रूप में दोनों के एक साथ आने में कोई समस्या नहीं है, लेकिन समस्या तब आएगी, जब उस मोर्चे से कांग्रेस को बाहर रखने की बात आएगी.

इस समय हेमंत सोरेन न केवल कांग्रेस के साथ मिलकर झारखंड में साझा सरकार चला रहे हैं, बल्कि वो उसके साथ मिलकर चुनाव भी लड़ते हैं. इसलिए कांग्रेसविहीन किसी मोर्चे में शामिल होने का तो फिलहाल कोई सवाल ही नहीं उठता है. दरअसल यह सारी कसरत केसीआर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए कर रहे हैं. उस चुनाव में वो खुद को नरेन्द्र मोदी के प्रतिद्वंद्वी के रूप में पेश करना चाह रहे हैं. हेमंत सोरेन जब तक कांग्रेस के साथ हैं, वो केसीआर के साथ जाकर न तो किसी कांग्रेस विरोधी मोर्चे का घटक बन सकते हैं और न ही किसी गैर-कांग्रेसी नेता को नरेन्द्र मोदी के खिलाफ प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के रूप में समर्थन कर सकते हैं.

हेमंत सोरेन अकेले चुनाव लड़कर नहीं जीत सकते

हेमंत सोरेन की एक समस्या यह है कि वो अपनी पार्टी के बूते अकेले चुनाव लड़कर जीतने की स्थिति में नहीं हैं. एक पार्टी के रूप में बीजेपी उनकी पार्टी पर भारी है और जेएमएम की छवि एक आदिवासी पार्टी की बन गई है, हालांकि यह पूरी तरह सच नहीं है. लेकिन, इस छवि के कारण हेमंत सोरेन की स्वीकार्यता सीमित है. इसीलिए वो न केवल कांग्रेस से बल्कि राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के साथ भी गठबंधन करते हैं. उधर, आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने कुछ दिन पहले ही कहा है कि केन्द्र की राजनीति में उनकी पार्टी कांग्रेस की सहयोगी बनी रहेगी.

इसलिए केन्द्र की राजनीति के बारे में अपना रुख बदलने के पहले हेमंत सोरेन को आरजेडी को भी विश्वास में लेना होगा. जहां तक केसीआर की बात है, तो वो अपनी मुहिम में लगे हुए हैं. वो अपने को राष्ट्रीय नेता के रूप में पेश कर रहे हैं, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य तेलंगाना में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखना है, जिसे बीजेपी से चुनौती मिल रही है.

KCR को तेलंगाना में BJP से लगातार मिल रही चुनौती

बीजेपी तेलंगाना में उग्र हिन्दुत्व की राजनीति कर रही है और मुस्लिमों से संबंधित केसीआर के कुछ निर्णयों के खिलाफ आंदोलन करती रहती है. केसीआर को लगता है कि यदि बीजेपी की चुनौती का सामना करना है, तो उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में अपना कद उसी तरह ऊंचा करना होगा, जिस तरह ममता बनर्जी ने कर रखा है. उनकी गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेसी नेताओं से मुलाकात को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए, और जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है कि फिलहाल हेमंत सोरेन कांग्रेस को छोड़कर केसीआर के कद निर्माण की कसरत करने के बारे में सोच भी नहीं सकते.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

Tags: CM Hemant Soren, CM KCR, Jharkhand news, Jharkhand Politics

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