विकास से कोसों दूर हैं रांची के ये गांव, आज भी नाले का पानी पीते हैं ग्रामीण

रांची के अनगढ़ा प्रखंड की ये तस्वीर हैरान करने वाली है.

रांची के अनगढ़ा प्रखंड की ये तस्वीर हैरान करने वाली है.

Ranchi News: रांची से करीब 40 किमी की दूरी पर स्थित अनगड़ा प्रखंड के कई गांवों में आज भी राज्य सरकार की पेयजल योजना नहीं पहुंच पाई है. लिहाजा कुम्हार टोली, दुबलाबेड़ा और रासबेड़ा जैसे गांवों के ग्रामीण आज भी चूएं (नाले) का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं.

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रांची. झारखंड के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर राज्य सरकार (Hemant Government) लाख दावे कर रही हो, लेकिन हकीकत सरकारी दावों से बिल्कुल उलट है. बात रांची जिले (Ranchi) की ही की जाए, तो आज भी कई गांव चूआं का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं. कहते हैं कि राजधानी पूरे राज्य के विकास का आइना होती है. अगर राजधानी में ही ये हाल है तो दूसरे जिलों में तरक्की का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है.

बड़ी अचरज की बात यह है आजादी के 74 साल बाद भी राजधानी रांची के ग्रामीण इलाके प्यासे नजर आ रहे हैं. रांची से करीब 40 किमी की दूरी पर स्थित अनगड़ा प्रखंड के कई गांवों में आज भी राज्य सरकार की पेयजल योजना नहीं पहुंच पाई है. लिहाजा कुम्हार टोली, दुबलाबेड़ा और रासबेड़ा जैसे गांव के ग्रामीण आज भी चूएं (नाला) का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं.

चारों ओर पहाड़ और जंगल से घिरे दुबलाबेड़ा में हर दिन ग्रामीण महिलाएं बर्तन लेकर एक छोटे से चूएं के पास पहुंचती है. लेकिन पानी का रंग देखकर अस्पताल जाने के सिवा कोई चारा नहीं नजर आता. गांव में पहुंचने के लिए महज एक पथरीली सड़क है. इसी सड़क से चलकर चार गांव के ग्रामीण हर दिन गुजरते हैं.

अनगड़ा प्रखण्ड के कुच्चू पंचायत के दुबलाबेड़ा के रहने वाले बुजुर्ग खड़िया तिग्गा बताते हैं कि पिछले 70 सालों से पहाड़ और जंगल के बीच बसे इस गांव की दशा नहीं बदली. यहां के लोगों का दाढ़ी यानि चुआं का पानी पीना अब नसीब बन चुका है.
इसी गांव के रहने वाले युवक जोन कामत की मानें तो दूषित पानी पीने से ग्रामीण अक्सर बीमार पड़ते हैं. लेकिन पथरीला रास्ता होने की वजह से अस्पताल पहुंचाने में काफी मुश्किल होती है. कई बार रास्ते में ही मरीज की मौत हो जाती है.

मरियम तिर्की बताती हैं कि वह 40 साल पहले शादी कर गांव पहुंची थी. तब से लेकर आज तक वह दाढ़ी का ही पानी पी रही हैं.

अनगड़ा प्रखंड के दुबलाबेड़ा से थोड़ी ही दूरी पर कुम्हार टोली है. यहां पहाड़ से बहते पानी में ग्रामीण जहां अपनी दिनचर्या निपटाते हैं, वहीं थोड़ी ही दूरी पर बने चुआं पर ग्रामीण महिलाओं का झुंड पानी के लिए हर सुबह उमड़ता है.



ग्रामीण महिलाओं की मानें तो उन्होंने आज तक चूएं के अलावा दूसरा पानी नहीं पीया. गांव में 22 साल पहले चापाकल लगाया गया, लेकिन वह 2 साल के बाद ही खराब हो गया.

न्यूज-18 ने जब इस संबंध में अनगड़ा प्रखंड के बीडीओ उत्तम प्रसाद को जानकारी दी तो वह चौक गए और भरोसा दिलाया कि जल्द से जल्द ग्रामीणों की तमाम समस्याओं का निपटारा किया जाएगा.

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