यह है 250 साल पुराना चमत्कारी रानी कुआं, जिसके पानी से ठीक हो जाता था चर्मरोग
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लोगों का मानना है कि यह कुआं करीब 250 वर्ष पुराना है और इसका पानी भीषण सुखाड़ में भी नहीं सूखा. स्थानीय लोगों के मुताबिक इस कुआं के पानी से चर्म रोग की समस्या दूर हो जाती है.

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झारखंड की राजधानी रांची से 23 किलोमीटर दूर कांके प्रखंड का बुकरू बस्ती में चमत्कारिक रानी कुआं है. लोगों का मानना है कि यह कुआं करीब 250 वर्ष पुराना है और इसका पानी भीषण सुखाड़ में भी नहीं सूखा. स्थानीय लोगों के मुताबिक इस कुआं के पानी से चर्म रोग की समस्या दूर हो जाती है. इसकी खासियत थी कि पानी निकालने के लिए लोगों को बाल्टी और रस्सी का सहारा नहीं लेना पड़ता था. बता दें कि साढ़े तीन सौ फीट गहरे कुएं तक पहुंचने के लिए सुरंगनुमा दो सीढ़ी बनाई है. जिसे भी पानी लेना होगा था वे सीढ़ीयों के सहारे नीचे जाकर पानी ले आते थे.

लोगों के बीच चर्चा में है ये दंत कथा

दंत कथाओं की माने तो कुएं के निर्माण की कहानी भी दिलचस्प है. लोग कहते हैं कि तक्कालीन रियासत के एक राजा जो साहू परिवार से थे. उनकी मौत के बाद जब लोग श्मशान ले जा रहे थे, उसी दौरान वह उठ बैठे. लोग उन्हें भूत समझकर वहां से भाग निकले. इसके बाद साहू परिवार को वो राजा अपनी पत्नी के पास पहुंचा और बोला कि कुछ काम बाकी रह गया है, जिसे पूरा करना है. इसके बाद ही उन्होंने यहां एक ऐसा कुआं बनवाया जिससे कोई प्यासा ना लौटे. इसके साथ ही यह हिदायत दी गई थी कि कोई भी व्यक्ति कुएं में उतरकर इसके पानी को जूठा ना करें.



यह कुआं करीब 250 वर्ष पुराना है और इसका पानी भीषण सुखाड़ में भी नहीं सूखा-Rani ka Kuwan
यह कुआं करीब 250 वर्ष पुराना है और इसका पानी भीषण सुखाड़ में भी नहीं सूखा.

लोग की माने तो पानी में है चमत्कारिक गुण

कुएं के निर्माण के बाद की कहानी और भी दिलचस्प है. स्थानीय लोग बताते हैं कि इस कुएं की पानी में कई ऐसे तत्व पाये जाते थे, जिससे कई प्रकार के चर्म रोग ठीक हो जाता था. उस वक्त विशेष तौर हर घर में होने वाले पूजा में इस कुएं का पानी जरूरी होता था. बुकरू बस्ती का यह कुआं इतना विख्तात था कि रातु महाराज दो बार अपने दल बल के साथ इसे देखने आये थे. तब उन्होंने साहू परिवार की काफी तारीफ भी की थी. लोगों के घरों में पंचायत और नगर निगम से पानी की आपूर्ति होने लगी और फिर इस कुएं को अपनों की नजर लग गयी. बाद के दिनों में यह कुआं धीरे-धीरे बदहाली की स्थिति में पहुंच गया.

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