रांची के इस गांव ने जल संरक्षण कर सबको चौंकाया, PM मोदी ने 'मन की बात' में की तारीफ

आचार संहिता लागू होने के कारण मजदूरों को मनरेगा के तहत काम भी नहीं मिल पा रहा था. ऐसे में ग्रामीणों ने श्रमदान करने की ठानी और देखते ही देखते पहाड़ों की इस उंचाई से पानी को जमीन पर उतारकर देश दुनियां को जल संरक्षण का संदेश देने में सफल हो गये.

News18 Jharkhand
Updated: July 28, 2019, 8:06 PM IST
रांची के इस गांव ने जल संरक्षण कर सबको चौंकाया, PM मोदी ने 'मन की बात' में की तारीफ
जल संरक्षण के लिए पीएम मोदी ने की इस गांव की तारीफ
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Updated: July 28, 2019, 8:06 PM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' में रांची का जिक्र आने के बाद यहां के लोग काफी उत्साहित हैं. नशा मुक्ति में सफलता अर्जित करने के बाद रांची के आरा केरम गांव ने एक और इतिहास रच दिया है. पीएम मोदी भी यहां के बड़का पहाड़ से खेतों तक पानी पहुंचाने की जल संरक्षण योजना की तारीफ किए बिना रह नहीं पाए.

आज के समय में जलसंकट एक बड़ी समस्या है, इसके समाधान के लिए हर कोई चिंतित है. खेतों में पानी पहुंचने की बात तो दूर लोग पेयजल संकट से भी जूझ रहे हैं. ऐसे में आरा केरम गांव के ग्रामीणों ने जो पहल की है, उसकी सराहना पूरे देश में हो रही है. बड़का पहाड़ की चोटी पर स्थित झरने के पानी को खेतों और डोभा-तालाब तक पहुंचाने में सफल हुए यहां के ग्रामीण ने जल संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है.

तीन महीने के अंदर खत्म किया जल संकट
ग्राउंड जीरो पर पहुंची न्यूज 18 की टीम ने जब इसका मुआयना किया तो यह बात सच साबित हुई. जंगली रास्ते से होकर करीब एक घंटे की चढ़ाई चढ़ने के बाद न्यूज18 की टीम उस झरने के पास पहुंची जहां से पानी के प्रवाह को चैनलाइज करने का काम ग्रामीणों ने महज तीन महीनों के अंदर कर डाला है.

एक घंटे की चढ़ाई चढ़ने के बाद न्यूज18 की टीम उस झरने के पास पहुंची


इस तरह से किया जल संग्रह
कच्चा बोल्डर और पाइप के सहारे पहाड़ की इस ऊंचाई से सैकड़ों फीट नीचे पानी लाने में सफल हुए आरा केरम गांव की यह तकनीक वाकई में बेहतरीन है. यहां पर नीचे ग्रामीणों ने सैकड़ों डोभा और तालाब का निर्माण कर जल संग्रह करने का काम किया है. जिससे ना केवल सिंचाई का काम होता है, बल्कि पेयजल की समस्या भी यहां के लोगों को कभी भी नहीं होती है.
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इस तरह से किया जल संग्रह


लोकसभा चुनावों के दौरान शुरू किया था काम
ग्रामीणों ने बीच-बीच में पत्थर के बोल्डर देकर चेक डैम बनाया है, जिससे पानी के बहाव से पहाड़ों की मिट्टी की कटाई को रोका जा सके और पानी भी नीचे तक धीरे-धीरे पहुंचे. जिससे खेतों और डोभा-तालाब आदि में संरक्षित की जा सके. ग्रामीणों द्वारा यह काम उस समय किया जा रहा था जब देश में लोकतंत्र के महापर्व यानि लोकसभा चुनाव में देश में लोग व्यस्त थे.

ग्रामीणों ने श्रमदान करने की ठानी
आचार संहिता लागू होने के कारण मजदूरों को मनरेगा के तहत काम भी नहीं मिल पा रहा था. ऐसे में ग्रामीणों ने श्रमदान करने की ठानी और देखते ही देखते पहाड़ों की इस ऊंचाई से पानी को जमीन पर उतारकर देश दुनिया को जल संरक्षण का संदेश देने में सफल हो गये.

मेहनत आखिरकार रंग लाई


आज पानी की कोई कमी नहीं
करीब 600 की आबादी वाले इस गांव में अधिकांश लोग खेती और मजदूरी पर आश्रित हैं. जाहिर तौर पर पानी की आवश्यकता यहां के लोगों के लिए बहुत ही जरूरत की चीज थी. ऐसे में महाराष्ट्र जाकर कुछ ग्रामीणों ने जल संरक्षण को नजदीकी से देखा. उसके बाद उनकी मेहनत आखिरकार रंग लाई और गांव में आज पानी की कोई कमी नहीं है. वाकई में आरा केरम के ग्रामीणों ने बहते हुए पानी को चलना सिखाया, चलते हुए पानी को रेंगना सिखाया और रेंगते हुए पानी को खेतों तक पहुंचाकर जल संरक्षण के लिए मिसाल कायम की.
(भुवन किशोर झा की रिपोर्ट)

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First published: July 28, 2019, 7:57 PM IST
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