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प्रदेश में बढ़ रहा एड्स, जागरुकता रैली आज

प्रदेश में बढ़ रहा एड्स, जागरुकता रैली आज

झारखंड में वर्ष 2012 तक व्यस्क एचआईवी प्रसार संख्या 0.25 थी जो घट कर 0.19 हो गई है. घटते आंकड़ जाहिर करते हैं कि प्रदेश में एड्स को लेकर जागरुकता फैल रही है. वर्ल्ड एड्स डे के मौके पर मंगलवार को भी शहर में जेसेक्स, आरयूएनएसएस इकाई के बैनर तले कई शिक्षण संस्थान जागरुकता रैली निकालेंगे.

झारखंड में वर्ष 2012 तक व्यस्क एचआईवी प्रसार संख्या 0.25 थी जो घट कर 0.19 हो गई है. घटते आंकड़ जाहिर करते हैं कि प्रदेश में एड्स को लेकर जागरुकता फैल रही है. वर्ल्ड एड्स डे के मौके पर मंगलवार को भी शहर में जेसेक्स, आरयूएनएसएस इकाई के बैनर तले कई शिक्षण संस्थान जागरुकता रैली निकालेंगे.

झारखंड में वर्ष 2012 तक व्यस्क एचआईवी प्रसार संख्या 0.25 थी जो घट कर 0.19 हो गई है. घटते आंकड़ जाहिर करते हैं कि प्रदेश में एड्स को लेकर जागरुकता फैल रही है. वर्ल्ड एड्स डे के मौके पर मंगलवार को भी शहर में जेसेक्स, आरयूएनएसएस इकाई के बैनर तले कई शिक्षण संस्थान जागरुकता रैली निकालेंगे.

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    झारखंड में वर्ष 2012 तक व्यस्क एचआईवी प्रसार संख्या 0.25 थी जो घट कर 0.19 हो गई है. घटते आंकड़ जाहिर करते हैं कि प्रदेश में एड्स को लेकर जागरुकता फैल रही है. वर्ल्ड एड्स डे के मौके पर मंगलवार को भी शहर में जेसेक्स, आरयूएनएसएस इकाई के बैनर तले कई शिक्षण संस्थान जागरुकता रैली निकालेंगे.

    रैली शहीद चौक से निकल पर मोरहाबादी के दीक्षांत मंडप तक जाएगी. इस दौरान सिग्नेचर कैंपेन, नुक्कड़ नाटक आदि का आयोजन होगा. स्कूली बच्चों के लिए डिबेट कंपीटिशन आदि भी आयोजित होंगे. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आरयू के वीसी डॉ रमेश पांडेय मौजूद रहेंगे.

    बढ़ी हैं चुनौती

    हालांकि नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाजेशन के आंकड़ों को माने तो राज्य में पिछले चार-पांच वर्षों में एचआईवी संक्रमित नए मरीजों की संख्या बढ़ी है. नए वयस्क एचआईवी संक्रमित मरीजों (15 वर्ष या उससे अधिक के) में झारखंड देश के तीन सर्वाधिक प्रभावित राज्यों में शामिल है. आंध्र प्रदेश में 16600, उड़ीसा में 12700 और झारखंड में 9085 मरीज पीड़ित हैं.

    ये नए संक्रमित मरीज हैं. ऐसे पूरी संख्या देखें तो झारखंड में एड्स के 18 हजार मरीज हैं. एड्स से सूबे में 1947 मौत हुई हैं. एड्स के सर्वाधिक मामले गिरिडीह, बोकारो, खूंटी, धनबाद, रांची, हजारीबाग, पूर्वी सिंहभूम और बहरगोड़ा जिले में मिले हैं.

    इसलिए होता है एड्स

    एचआईवी संक्रमित व्यक्ति का रक्त चढ़ाए जाने पर, एचआईवी पॉजिटिव महिला की गर्भावस्था या स्तनपान से शिशु को संक्रमण, एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति पर इस्तेमाल की गई सुई के दुबारा इस्तेमाल पर ब्लेड, उस्तरा, टूथपेस्ट को शेयर करने से शरीर के अन्य द्रव्यों जैसे रक्त, वीर्य आदि के मिल जाने से.

    कंट्रोल के लिए कवायद

    जेसेक्स 64 आईसीटी सेंटर चला रहा है. इनमें जांच के साथ पीड़ितों की काउंसिलंग होती है. आठ एंटी रेट्रोवायरल ट्रीटमेंट सेंटर हैं जो रिम्स, धनबाद, देवघर टाटा, मेदिनी नगर और हजारीबाग में है. नार्को से सहायता प्राप्त 23 ब्लड बैंक हैं. लिंक ए आरटी पांच है.

    एफआईसीटी की संख्या 20 है. गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए राज्य भर में कई सेंटर हैं. ट्रक ड्राइवर, बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों की स्क्रीनिंग की जा रही है. एक अखबार को दिए इंटरव्यू में एड्स कंट्रोल सोसायटी के परियोजना पदाधिकारी डॉ बीपी चौरसिया ने कहा कि एड्स से कोई मरता नहीं. बस इम्युनिटी पावर को बनाए रखने की दरकार होती है.

    Tags: Aids, HIV, Jharkhand news, रांची

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