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नन्हे बच्चे ने स्कूली शिक्षा पाने के लिए बाल संरक्षण आयोग से लगाई गुहार

नन्हे बच्चे ने स्कूली शिक्षा पाने के लिए बाल संरक्षण आयोग से लगाई गुहार

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के द्वारा आज बाल अधिकार एवं शिक्षा के अधिकार पर राज्यस्तरीय जन सुनवाई का आयोजन किया। डोरंडा स्थित वन विभाग सभागार में आयोजित इस जन सुनवाई के दौरान न केवल बच्चों ने अपनी समस्या से अवगत कराया बल्कि उनके साथ आए ग्रामीणों ने खुलकर अपनी बातों को रखा। इन सबके बीच एक नन्हा बालक सुकरा ने जब आपबीती बताई तो वहां बैठे सभी लोग हतप्रभ रह गए।

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के द्वारा आज बाल अधिकार एवं शिक्षा के अधिकार पर राज्यस्तरीय जन सुनवाई का आयोजन किया। डोरंडा स्थित वन विभाग सभागार में आयोजित इस जन सुनवाई के दौरान न केवल बच्चों ने अपनी समस्या से अवगत कराया बल्कि उनके साथ आए ग्रामीणों ने खुलकर अपनी बातों को रखा। इन सबके बीच एक नन्हा बालक सुकरा ने जब आपबीती बताई तो वहां बैठे सभी लोग हतप्रभ रह गए।

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के द्वारा आज बाल अधिकार एवं शिक्षा के अधिकार पर राज्यस्तरीय जन सुनवाई का आयोजन किया। डोरंडा स्थित वन विभाग सभागार में आयोजित इस जन सुनवाई के दौरान न केवल बच्चों ने अपनी समस्या से अवगत कराया बल्कि उनके साथ आए ग्रामीणों ने खुलकर अपनी बातों को रखा। इन सबके बीच एक नन्हा बालक सुकरा ने जब आपबीती बताई तो वहां बैठे सभी लोग हतप्रभ रह गए।

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राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के द्वारा आज बाल अधिकार एवं शिक्षा के अधिकार पर राज्यस्तरीय जन सुनवाई का आयोजन किया। डोरंडा स्थित वन विभाग सभागार में आयोजित इस जन सुनवाई के दौरान न केवल बच्चों ने अपनी समस्या से अवगत कराया बल्कि उनके साथ आए ग्रामीणों ने खुलकर अपनी बातों को रखा। इन सबके बीच एक नन्हा बालक सुकरा ने जब आपबीती बताई तो वहां बैठे सभी लोग हतप्रभ रह गए।

रांची के नामकुम प्रखंड के हरदाग गांव का रहने वाला सुकरा की आत्मकथा किसी फिल्म की सच्ची घटना से कम नहीं है। जन्म लेते ही मां-बाप के सहारे से दूर होकर जिंदगी की जंग लड़ रहा यह नन्हा बालक अब पढ़ाई करना चाहता है, मगर उसकी इस ख्वाहिश को घर के अन्य लोग पूरे नहीं होने दे रहे हैं।

दरअसल मां-बाप का सहारा छीन जाने के बाद सुकरा अपने बड़े भाई की देखरेख में रह रहा है और उसके घर में कोई भी शिक्षित नहीं है।ऐसे में शिक्षा के प्रति सुकरा के परिवार में कोई दिलचस्पी नहीं है और लोग मवेशी चराने के साथ साथ अन्य छोटे मोटे काम कर जीवन यापन कर रहे हैं। शुक्रवार को बाल संरक्षण आयोग की जन सुनवाई में सुकरा ने अपनी आपबीती सुनाकर आयोग से स्कूली शिक्षा दिलाने की जब गुहार लगाई तो सभी लोग स्तब्ध रह गए।
इधर सुकरा के इस फरियाद को सुनने के बाद आयोग ने इस दिशा में पूरा सहयोग करने का भरोसा दिया है। साथ ही जनसुनवाई के दौरान आए सभी मामलों से सरकार को अवगत कराने की बात कही है।

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