तोक्यो ओलंपिक में झारखंड से पदक की उम्मीद, तीरंदाजों के लिए करनी होगी ये पहल

तीरंदाज दीपिका कुमारी से तोक्यो ओलंपिक में गोल्ड की उम्मीद है. (फाइल फोटो)

तीरंदाज दीपिका कुमारी से तोक्यो ओलंपिक में गोल्ड की उम्मीद है. (फाइल फोटो)

Tokyo Olympics Preparation: JSSPS के अधिकारी की मानें तो एक बार जब तीरंदाज ओलंपिक जैसे टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई करता है तो उसके ट्रेनिंग की पूरी व्यवस्था भारतीय तीरंदाजी संघ के जिम्मे होती है.

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रांची. तोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में गोल्ड को लेकर देश की नजरें झारखंड की ओर टिकती नजर आ रही है. स्टार तीरंदाज दीपिका कुमारी (Archer Deepika Kumari) ने तोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई कर लिया है. वहीं दो और महिला तीरंदाज ने भी ओलंपिक के टिकट के लिए प्रबल दावेदारी में हैं. लेकिन सवाल यह है कि व्यक्तिगत प्रदर्शन के बूते खुद को साबित कर चुकी तीरंदाज बेटियों के लिए राज्य सरकार की प्रशिक्षण व्यवस्था कितनी मुकम्मल है. और तोक्यो ओलंपिक पर निशाना साधने के लिए इस बार क्या पहल की जा रही है. वक्त आ गया है तोक्यो ओलंपिक के गोल्ड पर निशाना साधने और उम्मीद भरी नजरों से झारखंड की ओर देखने का.

तीरंदाज दीपिका ने एक बार फिर ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करते हुए तोक्यो में गोल्ड पर निशाना साधने की कोशिश करेंगी. वहीं कोमोलिका बारी और अंकिता भकत भी तोक्यो ओलंपिक के लिए प्रबल दावेदार हैं. हालांकि उन्हें पहले जून में होने वाले पेरिस वर्ल्ड कप में बेहतर प्रदर्शन कर ओलंपिक का टिकट लेना होगा. पदक को लेकर झारखंड से उम्मीदों के बीच एक बड़ी बहस इस बात को लेकर शुरू हो गयी है कि तीरंदाजी और प्रशिक्षण को लेकर राज्य सरकार की तैयारी कितनी बेहतर है. सवाल यह भी है कि क्या झारखंड सरकार ओलंपिक को लेकर अपने तीरंदाजों को विदेशी आवोहवा में ढलने के लिए क्या कुछ समय पहले तोक्यो भेज सकती है. क्या इसको लेकर भारतीय तीरंदाजी संघ के साथ कोई बातचीत या पहल की गयी है.

हम इन तमाम सवालों को लेकर राज्य सरकार की सबसे उच्च गुणवत्ता और प्रशिक्षण वाले एकलव्य तीरंदाजी केंद्र पहुंचे, जहां कोच ने भी साफ कहा कि तोक्यो के वातावरण और आवोहवा को समझने के लिए थोड़ा पहले तीरंदाजों को वहां भेजना चाहिए. उन्होंने कहा कि तीरंदाजों को लेकर राज्य सरकार की प्रशिक्षण व्यवस्था हालांकि बेहतर है लेकिन ओलंपिक और वर्ल्ड कप जैसी प्रतियोगिता के लिए काफी सुधार की जरूरत है. दरअसल राज्य सरकार की ओर से राज्यभर में तीरंदाजी प्रशिक्षण को लेकर पांच आवासीय केंद्र हैं. जिसमें रांची के सिल्ली, दुमका, सरायकेला खरसांवा, चाईबासा का कुमारडुबी और बोकारो का चंदनकियारी में प्रशिक्षण केंद्र है. जो बच्चे इन आवासीय विद्यालयों में बेहतर प्रदर्शन कर खुद को राज्यस्तर या फिर राष्ट्रीय स्तर पर साबित करते हैं. उनके लिए रांची के होटवार और दुमका के दुधानी में सेंटर फॉर एक्सीलेंस एकलव्य प्रशिक्षण केंद्र हैं. इसके अलावा रांची के मेगास्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में राज्य सरकार और सीसीएल के सहयोग से JSSPS के माध्यम से भी छोटे बच्चों को तीरंदाजी के गुर सिखाये जा रहे हैं. यहां प्रशिक्षण ले रहे कई खिलाड़ी खुद को राष्ट्रीय स्तर पर साबित कर पदक जीत चुके हैं. मेगास्पोर्ट्स कॉमप्लेक्स और सेंटर फॉर एक्सीलेंस एकलव्य प्रशिक्षण केंद्र का मकसद ही ओलंपिक जैसे बड़े टूर्नामेंट को लेकर तीरंदाजों को प्रशिक्षण देकर तैयार करना है.

JSSPS के अधिकारी की मानें तो एक बार जब तीरंदाज ओलंपिक जैसे टूर्नामेंट के लिए क्वालिफाई करता है तो उसके ट्रेनिंग की पूरी व्यवस्था भारतीय तीरंदाजी संघ के जिम्मे होती है. लेकिन सवाल फिर यही उठता है कि राज्य के खिलाड़ियों की सही तकनीक और फिटनेस की जानकारी राज्य के अधिकारियों को ही होती है. ऐसे में खिलाड़ियों को विदेशी माहौल में ढलने के लिए झारखंड तीरंदाजी संघ की ओर क्या पहल की जाती है. इसपर सबकी नजर है.
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