पद्मभूषण डॉ. कामिल बुल्के रांची में करेंगे विश्राम, संत जेवियर्स कॉलेज में बनी समाधि

पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. कामिल बुल्के को 1950 में भारत की नागरिकता मिली थी. उनके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के मद्देनज़र ही उनके पवित्र अवशेष को रांची लाया गया और प्रेरणा स्वरूप उनकी समाधि बनाई गई.

Naushad Alam | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: March 14, 2018, 3:13 PM IST
पद्मभूषण डॉ. कामिल बुल्के रांची में करेंगे विश्राम, संत जेवियर्स कॉलेज में बनी समाधि
डॉ. कामिल बुल्के की संत जेवियर्स कॉलेज परिसर में बनाई गई समाधि
Naushad Alam | ETV Bihar/Jharkhand
Updated: March 14, 2018, 3:13 PM IST
महान शिक्षाविद् डॉ. कामिल बुल्के अब हमेशा के लिए राजधानी रांची में विश्राम करेंगे. संत जेवियर्स कॉलेज परिसर में बुधवार को उनकी समाधि बनाई गई है. इससे पूर्व धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया और डॉ. कामिल बुल्के को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. इस दौरान कार्डिनल समेत शहर के गणमान्य लोग उपस्थित थे.

जाने-माने शिक्षाविद् डॉ. कामिल बुल्के की कर्मभूमि रांची थी. सन् 1982 में गम्भीर बीमारी के कारण दिल्ली में उनका देहांत हो गया था. पिछले दिनों उनका पवित्र अवशेष हवाई मार्ग से रांची लाया गया था. राजधानी रांची के पुरुलिया रोड स्थित मनरेसा हाउस से उनके पवित्र अवशेष को संत जेवियर्स कॉलेज लाया गया. इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने उनके कार्यो पर प्रकाश डाला. साथ ही धार्मिक रीति-रिवाज से उन्हें श्रद्धांजलि दी गई.

डॉ. कामिल बुल्के का जन्म बेल्जियम में सन् 1909 में हुआ था. दार्शनिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद डॉ. बुल्के 1935 में भारत पहुंचे. प्रदेश के गुमला में उन्होंने पांच साल तक गणित के शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान की. 1938 में उन्होंने हजारीबाग में हिंदी और संस्कृत की शिक्षा प्राप्त की. रांची के संत जेवियर्स कॉलेज में वह हिंदी एवं संस्कृत के विभागाध्यक्ष भी रहे.

डॉ. कामिल बुल्के ने शिक्षा के क्षेत्र में कई किर्तिमान स्थापित किए. पद्मभूषण से सम्मानित डॉ. कामिल बुल्के को 1950 में भारत की नागरिकता मिली थी. उनके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के मद्देनज़र ही उनके पवित्र अवशेष को रांची लाया गया और प्रेरणा स्वरूप उनकी समाधि बनाई गई.
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